कानपुर में लैंबॉर्गिनी कार हादसे पर कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
लैंबॉर्गिनी कार को कोर्ट ने दी रिहाई
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में हुए लैंबॉर्गिनी कार दुर्घटना के मामले में अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा ने करोड़ों की लैंबॉर्गिनी को रिहा करने का निर्देश दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि वाहन के मालिक को कार प्राप्त करने के लिए 8 करोड़ 30 लाख रुपये की जमानत राशि जमा करनी होगी। इसके अलावा, उन्हें एक लिखित अंडरटेकिंग भी प्रस्तुत करनी होगी। अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान कार को न तो बेचा जा सकता है और न ही इसके रंग, इंजन, चेसिस या किसी अन्य हिस्से में कोई बदलाव किया जा सकता है। वाहन के मालिक ने कार का रिहाई आदेश प्राप्त कर लिया है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से रिहा कर दिया गया है।
शिवम मिश्रा के वकील सुनील कुमार ने अदालत में एक प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इस पर सीजेएम कोर्ट ने पुलिस से आपत्ति रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही, तकनीकी विशेषज्ञों से कार की मैकेनिकल जांच रिपोर्ट भी मांगी गई थी। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि जांच के लिए आवश्यक औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और कार को शर्तों के साथ रिहा किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि 8 फरवरी को तंबाकू व्यापारी केके मिश्रा के बेटे शिवम मिश्रा अपनी लैंबॉर्गिनी कार में यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान, उनकी कार ने भैरोघाट चौराहे के पास सड़क पार कर रहे चमनगंज निवासी तौफीक अहमद को टक्कर मार दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस मामले में आरोपी चालक शिवम मिश्रा को 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी गई थी।
