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कालका शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठे

हाल ही में कालका शताब्दी एक्सप्रेस में कुछ प्रभावशाली यात्रियों द्वारा उत्पात मचाने की घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यात्रियों ने मदद के लिए जीआरपी और आरपीएफ से संपर्क किया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी, लेकिन यात्रियों का कहना है कि जब उन्हें मदद की जरूरत थी, तब कोई भी सिस्टम काम नहीं कर रहा था। जानें इस पूरी घटना के बारे में।
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कालका शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल उठे

सोनीपत में हुई घटना

सोनीपत: भारतीय रेलवे द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और शांति को लेकर किए गए दावों की वास्तविकता एक बार फिर उजागर हुई है। हाल ही में कालका शताब्दी एक्सप्रेस में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों द्वारा उत्पात मचाने के कारण सामान्य यात्रियों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। इस घटना ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


हंगामे का विवरण

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने घटना की जानकारी साझा की। यह घटना ट्रेन संख्या 12012 (कालका शताब्दी एक्सप्रेस) के कोच नंबर सी-12 में हुई। पीड़ित परिवार शिमला से दिल्ली लौट रहा था। आरोप है कि कुछ सहयात्री लगभग ढाई से तीन घंटे तक हंगामा करते रहे, जिसमें कुछ महिला शिक्षक भी शामिल थीं।


यात्रियों के अनुसार, इन लोगों ने ट्रेन के अंदर तेज आवाज में रील्स बनाई, शोर मचाया और बिना अनुमति के अन्य यात्रियों की तस्वीरें खींचीं। इस शोर-शराबे से कोच में यात्रा कर रहे छोटे बच्चे डर गए।


सुरक्षा की कमी

जब हंगामा बढ़ गया, तो यात्रियों ने जीआरपी और आरपीएफ से मदद मांगी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद, यात्रियों ने रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल करने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी समस्याओं के कारण संपर्क नहीं हो सका। इस दौरान सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया

जब इस घटना का विवरण ट्विटर पर वायरल हुआ, तो रेलवे प्रशासन ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पीड़ित से संपर्क करने का अनुरोध किया और कहा कि यात्रियों को अपनी शिकायतों के लिए 'रेल मदद' की वेबसाइट पर जाना चाहिए या 139 पर कॉल करना चाहिए। हालांकि, यात्रियों का कहना है कि जब घटना हो रही थी, तब ये सेवाएं काम नहीं कर रही थीं।