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कीटनाशकों का वैश्विक प्रभाव: भारत और अन्य देशों की भूमिका

एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बताया गया है कि कीटनाशकों से होने वाला जहरीलापन मुख्यतः भारत, चीन, ब्राज़ील और अमेरिका से आता है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि 2030 तक कीटनाशक जोखिम को 50% कम करने का लक्ष्य हासिल करने में दुनिया पीछे है। भारत में कीटनाशक नियंत्रण के नियम पुराने हो चुके हैं, और नए Pesticides Management Bill 2025 लाने की योजना है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि कदम नहीं उठाए गए, तो जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर संकट आ सकता है।
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कीटनाशकों का वैश्विक प्रभाव: भारत और अन्य देशों की भूमिका

वैश्विक कीटनाशक उपयोग का अध्ययन


हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि विश्व में उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों से होने वाले कुल जहरीलेपन का लगभग 70% हिस्सा चार देशों - भारत, चीन, ब्राज़ील और अमेरिका से उत्पन्न होता है। यह जहरीलापन केवल कृषि कीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि मधुमक्खियों, मछलियों, मिट्टी के जीवों और पौधों जैसी कई महत्वपूर्ण प्रजातियों को भी प्रभावित करता है।


2030 के लक्ष्य की दिशा में प्रगति

संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन 2022 में देशों ने 2030 तक कीटनाशक जोखिम को 50% कम करने का संकल्प लिया था। हालांकि, वैज्ञानिक पत्रिका Science में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया इस लक्ष्य से काफी पीछे है। 2013 से 2019 के बीच 65 देशों में 600 से अधिक कीटनाशकों के उपयोग का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह पाया गया कि जहरीलापन घटने के बजाय बढ़ा है।


फसलों पर कीटनाशकों का प्रभाव

अध्ययन के अनुसार, फल-सब्जी, मक्का, सोयाबीन, चावल और अन्य अनाज वाली फसलों पर कीटनाशकों का सबसे अधिक उपयोग होता है। इससे खेत के कीट तो मरते हैं, लेकिन अन्य जीव भी प्रभावित होते हैं। सबसे अधिक नुकसान जमीन पर रहने वाले छोटे कीट-जीवों, मिट्टी के जीवों और मछलियों को हुआ है।


भारत में कीटनाशक कानून की स्थिति

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कीटनाशक नियंत्रण के नियम अब पुराने हो चुके हैं। Insecticides Act 1968 मुख्यतः कृषि उपयोग पर केंद्रित है, जबकि आज कीटनाशक घरेलू, फर्नीचर, अनाज भंडारण और निर्माण कार्यों में भी उपयोग किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत में कई ऐसे कीटनाशक हैं, जो यूरोप जैसे क्षेत्रों में प्रतिबंधित हैं।


नए कानून की आवश्यकता

सरकार Pesticides Management Bill 2025 लाने की योजना बना रही है, जिसका उद्देश्य पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर खतरे को कम करना है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि खेती में कम जहरीले या जैविक विकल्पों को अपनाने और कीटनाशकों के उपयोग का सही डेटा रखने से स्थिति में सुधार हो सकता है।


जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर खतरा

वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य दोनों पर गंभीर संकट आ सकता है। केवल चिली ही 2030 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसलिए टिकाऊ खेती और कम जहरीले रसायनों की ओर बदलाव को आवश्यक बताया गया है।