कृषि मंत्री ने नए सीड एक्ट की विशेषताएँ साझा कीं
नए सीड एक्ट का महत्व
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में नए सीड एक्ट (सीड एक्ट 2026) की विशेषताओं और इसके किसानों पर प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इसे किसानों की सुरक्षा, बीज की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक कदम बताया।
बीजों की गुणवत्ता पर सख्ती
शिवराज सिंह ने कहा कि बीजों की गुणवत्ता में अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले 500 रुपए तक का जुर्माना था, लेकिन अब प्रस्तावित जुर्माना 30 लाख रुपए तक हो सकता है। जानबूझकर अपराध करने पर सजा का भी प्रावधान है। उन्होंने कहा कि सभी कंपनियाँ खराब नहीं हैं, लेकिन जो किसान को धोखा देंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बीज की ट्रेसिबिलिटी की व्यवस्था
मीडिया के सवालों के जवाब में, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में बीज की ट्रेसिबिलिटी की व्यवस्था स्थापित की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बीज कहाँ उत्पादित हुआ, किस डीलर ने दिया और किसने बेचा। हर बीज पर क्यूआर कोड होगा, जिसे स्कैन करके किसान जान सकेगा कि वह बीज कहाँ से आया है। इससे घटिया या नकली बीजों को रोका जा सकेगा और यदि वे बाजार में आएंगे, तो जिम्मेदार व्यक्ति पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
नकली बीजों की पहचान
कृषि मंत्री ने कहा कि जैसे ही ट्रेसिबिलिटी लागू होगी, नकली या खराब बीज की पहचान तुरंत हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि खराब बीज बाजार में नहीं आएंगे, और यदि आएंगे, तो उन्हें पकड़ा जाएगा। जो खराब बीज देंगे, उन्हें दंडित किया जाएगा। इससे किसानों को भ्रमित करने वाली कंपनियों और डीलरों की मनमानी पर रोक लगेगी।
सीड कंपनियों का रजिस्ट्रेशन
उन्होंने बताया कि अब हर सीड कंपनी का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कौन सी कंपनी अधिकृत है। पंजीकृत कंपनियों की जानकारी उपलब्ध रहेगी और कोई भी अनधिकृत विक्रेता बीज नहीं बेच सकेगा। इससे बाजार में फर्जी कंपनियों का अंत होगा और किसानों को सही स्रोत का बीज मिलेगा।
परंपरागत बीजों का संरक्षण
केंद्रीय मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि नया कानून किसानों के परंपरागत बीजों पर रोक नहीं लगाएगा। उन्होंने कहा, 'किसान अपने बीज बो सकते हैं और दूसरे किसानों को बीज दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर परंपरागत बीज विनिमय की परंपरा जारी रहेगी।'
ग्रामीण परंपरा का महत्व
उन्होंने उदाहरण दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बोनी के समय किसान आपस में बीज लेते-देते हैं और बाद में उसे सवा गुना वापिस कर देते हैं, यह पारंपरिक प्रणाली आगे भी जारी रहेगी।
