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कृषि में सुधार के लिए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का मसौदा जारी

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का नया मसौदा पेश किया है, जिसका उद्देश्य किसानों को सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध कराना और नकली उत्पादों पर नियंत्रण को सख्त बनाना है। यह विधेयक कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों की गुणवत्ता और बिक्री के लिए एक नया कानूनी ढांचा प्रदान करता है। इसमें किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कई प्रावधान शामिल हैं, जैसे ट्रेसबिलिटी और डिजिटल समाधान। सरकार ने इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है, जिससे विशेषज्ञों और आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं।
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कृषि में सुधार के लिए कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का मसौदा जारी

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का उद्देश्य

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने हाल ही में कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2025 का नया मसौदा पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य 1968 के पुराने कीटनाशक अधिनियम और 1971 के नियमों को वर्तमान कृषि आवश्यकताओं के अनुरूप अपडेट करना है। यह विधेयक किसानों को सुरक्षित और मानक कीटनाशक उपलब्ध कराने के साथ-साथ नकली उत्पादों पर नियंत्रण को सख्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


विधेयक की विशेषताएँ

यह विधेयक कृषि में उपयोग होने वाले कीटनाशकों की गुणवत्ता, बिक्री और निगरानी के लिए एक नया कानूनी ढांचा प्रदान करता है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले पचास वर्षों में कृषि तकनीक, बाजार और सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं, जिसके कारण पुराने कानून अब प्रभावी नहीं रह गए हैं।


किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए

नए मसौदे को किसान-केंद्रित बताया गया है, जिसमें ऐसे प्रावधान शामिल हैं जो किसानों को बेहतर जानकारी, पारदर्शिता और सुरक्षा प्रदान करने पर जोर देते हैं।


मुख्य बिंदु:
• कीटनाशकों की ट्रेसबिलिटी, जिससे उत्पाद की पूरी जानकारी ट्रैक की जा सके।
• प्रक्रियाओं में डिजिटल और तकनीकी समाधान।
• किसानों को नकली और घटिया कीटनाशकों से बचाने के उपाय।


कृषि नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों का बाजार पर विश्वास बढ़ेगा और नुकसान की आशंका कम होगी।


नकली कीटनाशकों पर सख्त कार्रवाई

मसौदे में नकली या बिना मानक वाले कीटनाशक बेचने पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। अपराधों के निपटान के लिए कंपाउंडिंग व्यवस्था भी रखी गई है, जिसमें राज्य स्तरीय प्राधिकरण सजा तय करेगा।


सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य दंड के जरिए डर पैदा करना नहीं, बल्कि बाजार में अनुशासन लाना है।


प्रशासनिक सुधार और टेस्टिंग लैब

विधेयक में कीटनाशकों की जांच करने वाली लैब के लिए अनिवार्य एक्रेडिशन का प्रावधान रखा गया है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल गुणवत्ता जांचे हुए उत्पाद ही किसानों तक पहुंचें।


साथ ही, प्रशासनिक नियंत्रण को सरल बनाने की कोशिश की गई है ताकि किसानों की सुरक्षा बनी रहे, व्यवसाय करना आसान हो, और नियमों का पालन स्पष्ट और पारदर्शी रहे।


सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया

सरकार ने इस विधेयक को अंतिम रूप देने से पहले सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया शुरू की है। मसौदा कृषि मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है, जहां कोई भी व्यक्ति इसे पढ़ सकता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का खुला परामर्श बेहतर कानून बनाने में मदद करता है और जमीनी समस्याएं सामने लाता है।


सुझाव भेजने की प्रक्रिया

मसौदे पर टिप्पणियां और सुझाव ईमेल के माध्यम से भेजे जा सकते हैं। अंतिम तिथि 4 फरवरी 2026 तय की गई है।


सुझाव भेजते समय जरूरी जानकारी:
• नाम और पदनाम
• संपर्क विवरण जैसे पता, ईमेल, मोबाइल
• संगठन या एजेंसी का नाम यदि संबद्ध हों।


सरकार ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर मिले सभी सुझावों पर विधेयक को अंतिम रूप देते समय विचार किया जाएगा।


इस बदलाव का महत्व

भारत में हर साल बड़ी संख्या में किसान नकली कीटनाशकों से नुकसान झेलते हैं। नए कानून से फसल सुरक्षा बेहतर होगी, किसानों की आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा, और कृषि बाजार में भरोसा मजबूत होगा।


नीति विश्लेषकों का मानना है कि यह विधेयक खेती को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।