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केंद्र सरकार का 7295 करोड़ रुपये का निर्यात सहायता पैकेज

केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों के लिए 7295 करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया है। यह पैकेज विशेष रूप से एमएसएमई क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें ब्याज सहायता और कोलेटरल सपोर्ट शामिल हैं, जिससे निर्यातकों को व्यापार के लिए आवश्यक पूंजी प्राप्त करने में मदद मिलेगी। जानें इस पैकेज के प्रमुख बिंदुओं के बारे में।
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केंद्र सरकार का 7295 करोड़ रुपये का निर्यात सहायता पैकेज

विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा


7295 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज


बिजनेस डेस्क : पिछले साल अगस्त में अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए विशेष टैरिफ के कारण निर्यातकों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार ने तुरंत एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की। हाल ही में, सरकार ने 7,295 करोड़ रुपये के 'एक्सपोर्ट सपोर्ट पैकेज' की घोषणा की है।


पैकेज का उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य निर्यातकों, विशेषकर एमएसएमई क्षेत्र के लिए कर्ज की उपलब्धता को सरल और सस्ता बनाना है। यह योजना 2025 से 2031 तक लागू रहेगी। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इस पैकेज के माध्यम से निर्यातकों की व्यापार वित्त से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाएगा।


सहायता पैकेज का विभाजन

सरकार द्वारा घोषित 7,295 करोड़ रुपये के पैकेज को दो भागों में बांटा गया है। पहले भाग में ब्याज सहायता योजना के लिए 5,181 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि दूसरे भाग में कोलेटरल सपोर्ट के लिए 2,114 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी

ब्याज सहायता योजना के अंतर्गत, योग्य एमएसएमई निर्यातकों को प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर सब्सिडी मिलेगी। सरकार ने 2.75 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने का निर्णय लिया है, जबकि प्रति फर्म सालाना लाभ की सीमा 50 लाख रुपये निर्धारित की गई है। यह कदम वैश्विक व्यापार की चुनौतियों का सामना कर रहे निर्यातकों को प्रतिस्पर्धी दरों पर कर्ज प्राप्त करने में मदद करेगा। वहीं, 2,114 करोड़ रुपये के कोलेटरल सपोर्ट के तहत निर्यात से जुड़े कार्यशील पूंजी ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी उपलब्ध कराई जाएगी।