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केंद्र सरकार का जन विश्वास विधेयक: अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई

केंद्र सरकार ने अवैध कब्जों को रोकने के लिए जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया है। इस विधेयक में सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों के लिए कड़े दंड का प्रावधान है। इसमें जेल और जुर्माने का विकल्प भी शामिल है। इसके अलावा, 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है, जिससे व्यापार को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। जानें इस विधेयक के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधानों के बारे में।
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केंद्र सरकार का जन विश्वास विधेयक: अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई

सरकार का नया कदम अवैध कब्जों के खिलाफ


केंद्र सरकार ने सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया है, जिसमें ऐसे मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य कानून व्यवस्था को मजबूत करना और आम जनता तथा व्यापार से जुड़े नियमों को सरल बनाना है। प्रस्तावित संशोधनों से प्रशासनिक कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।


कड़े दंड का प्रावधान

सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार, पहले महीने में संबंधित संपत्ति के लाइसेंस शुल्क का 40 गुना जुर्माना लगाया जाएगा, और इसके बाद हर महीने में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी। यह कदम अवैध कब्जों को रोकने के लिए प्रभावी माना जा रहा है।


जेल और जुर्माने का विकल्प

विधेयक में गैर-आवासीय सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के लिए छह महीने तक की जेल या संपत्ति के मूल्य के अनुसार हर साल पांच प्रतिशत तक जुर्माना या दोनों सजा का प्रावधान है। इसके अलावा, मजिस्ट्रेट को ऐसे मामलों में त्वरित बेदखली का आदेश देने का अधिकार भी दिया जाएगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।


79 कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव

इस विधेयक के तहत 23 मंत्रालयों से संबंधित 79 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव है। कुल 784 प्रावधानों में बदलाव की योजना है, जिनमें से 717 को अपराध की श्रेणी से हटाकर व्यापार को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। वहीं, 67 प्रावधान आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बदले जाएंगे।


मोटर वाहन नियमों में राहत

विधेयक में मोटर वाहन अधिनियम से जुड़े 20 संशोधन भी शामिल हैं। इसके तहत वाहन पंजीकरण अब पूरे राज्य में कहीं भी कराया जा सकेगा। ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त होने के बाद 30 दिन की छूट अवधि मिलेगी और नवीनीकरण नई तारीख से प्रभावी होगा। साथ ही, वाहन पंजीकरण रद्द करने की सूचना देने की समय सीमा को बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव है।