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केंद्र सरकार की नई योजना: गधों और ऊंटों के पालन के लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी

केंद्र सरकार ने गधों और ऊंटों के पालन के लिए नई NLM योजना की शुरुआत की है, जिसमें 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और नस्ल सुधार के लिए है। जानें इस योजना के तहत आवेदन कैसे करें और किन राज्यों में गधों की संख्या सबसे अधिक है।
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केंद्र सरकार की नई योजना: गधों और ऊंटों के पालन के लिए 50 लाख रुपये तक की सब्सिडी

नई दिल्ली में केंद्र सरकार की पहल


नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने गधे, घोड़े और ऊंट जैसे पारंपरिक पशुओं की घटती संख्या को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत पालन करने वालों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना 2021-22 से संशोधित रूप में लागू है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, नस्ल सुधार और उत्पादकता में वृद्धि करना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2019 की पशुगणना में देश में गधों की संख्या केवल 1.23 लाख रह गई थी, जो 2012 से लगभग 61 प्रतिशत कम है।


कमी के कारण

घोड़ों, खच्चरों और ऊंटों की संख्या में भी कमी आई है। इसका मुख्य कारण यह है कि अब इनका पारंपरिक उपयोग जैसे बोझ ढोना और ईंट-रेत का परिवहन कम हो गया है। सरकार इन नस्लों को बचाने और पालन के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष उपाय कर रही है।


50 लाख रुपये तक की सब्सिडी

केंद्र सरकार की NLM योजना के अंतर्गत, व्यक्ति, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), संयुक्त दायित्व समूह (जेएलजी), किसान सहकारी संगठन (एफसीओ) और धारा 8 कंपनियां गधा, घोड़ा या ऊंट प्रजनन फार्म स्थापित करने के लिए आवेदन कर सकती हैं। सरकार परियोजना की कुल लागत का 50 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी देती है, जिसकी अधिकतम सीमा 50 लाख रुपये है।

उदाहरण के लिए, गधों के लिए न्यूनतम यूनिट 50 मादा और 5 नर होती है, जबकि घोड़ों के लिए 10 मादा और 2 नर की आवश्यकता होती है। ऊंटों के लिए सब्सिडी 3 लाख से 50 लाख रुपये तक मिल सकती है। यह सब्सिडी केवल स्वदेशी नस्लों के लिए उपलब्ध है, विदेशी नस्लों पर नहीं। सब्सिडी दो किस्तों में दी जाती है—पहली बैंक लोन मिलने पर और दूसरी प्रोजेक्ट पूरा होने पर।


राज्यों में गधों की संख्या

राज्यों को नस्ल संरक्षण के लिए सहायता मिलती है, जैसे वीर्य स्टेशन या न्यूक्लियस प्रजनन फार्म स्थापित करने पर 10 करोड़ रुपये तक की मदद। गधी के दूध को फूड प्रोडक्ट के रूप में मान्यता दिलाने के प्रयास चल रहे हैं, क्योंकि इसे औषधीय गुणों वाला माना जाता है। FSSAI से इसे खाद्य सामग्री में शामिल करने की मांग की गई है। गधों की संख्या सबसे अधिक राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में है, जबकि कई राज्यों में यह संख्या केवल 2 से 10 तक सीमित रह गई है। कुल 28 राज्यों में गधे पाए जाते हैं।


आवेदन करने की प्रक्रिया

इस योजना का लाभ उठाने के लिए, आधिकारिक पोर्टल nlm.udyamimitra.in पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल है, जिसमें बैंक लोन के साथ सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में आती है। यह प्रयास असंगठित क्षेत्र को संगठित करने, स्वदेशी नस्लों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का है, जिससे किसानों को नई आय का स्रोत मिल सके।