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केंद्र सरकार ने IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को बर्खास्त किया

केंद्र सरकार ने IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को बर्खास्त कर दिया है, जो कि भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह निर्णय कई सालों की कानूनी लड़ाई और विवादों के बाद आया है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं। जानें इस मामले की जड़ें, उच्च न्यायालय की भूमिका और यूपीएससी की सिफारिश के बारे में। इस बर्खास्तगी के पीछे की कहानी और इसके प्रभावों पर एक नज़र डालें।
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केंद्र सरकार ने IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को बर्खास्त किया

केंद्र सरकार का बड़ा निर्णय


भारतीय प्रशासनिक सेवा में किसी अधिकारी को बर्खास्त करने की घटनाएं आमतौर पर कम ही सुनने को मिलती हैं, लेकिन हाल ही में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 2003 बैच की AGMUT कैडर की वरिष्ठ अधिकारी पद्मा जायसवाल को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया गया है। वे हाल ही में दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में विशेष सचिव के रूप में कार्यरत थीं। यह निर्णय प्रधानमंत्री के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की सलाह पर लिया गया, जिसे राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दी।


अरुणाचल प्रदेश से जुड़ा मामला

यह विवाद अचानक उत्पन्न नहीं हुआ है, बल्कि इसकी जड़ें 2007 और 2008 में हैं, जब जायसवाल अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले में उपायुक्त थीं। फरवरी 2008 में स्थानीय नागरिकों ने उनके खिलाफ सरकारी पद का दुरुपयोग और सरकारी खजाने में हेराफेरी की शिकायत की थी। इस विवाद के बढ़ने पर उन्हें अप्रैल 2009 में निलंबित किया गया, लेकिन अक्टूबर 2010 में उनका निलंबन हटा लिया गया। जायसवाल ने 'द इंडियन एक्सप्रेस' को बताया कि उन्हें अपनी बर्खास्तगी के आदेश की कोई जानकारी नहीं थी।


कानूनी लड़ाई का सफर

इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी प्रक्रिया काफी जटिल रही है। प्रारंभ में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने गृह मंत्रालय द्वारा शुरू की गई कार्रवाई को खारिज कर दिया था। कैट का कहना था कि AGMUT कैडर के अधिकारियों पर गृह मंत्रालय का अधिकार नहीं है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील की। अदालत ने अप्रैल 2023 में केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया, जिससे जांच फिर से शुरू हुई।


यूपीएससी की सिफारिश

हाईकोर्ट से अनुमति मिलने के बाद, गृह मंत्रालय ने बिना किसी देरी के कार्रवाई शुरू की। जायसवाल को 2009 और 2010 में आरोप पत्र सौंपे गए थे। इस मामले में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और केंद्रीय सतर्कता आयोग से भी महत्वपूर्ण सलाह ली गई थी। जांच की गंभीरता को देखते हुए यूपीएससी ने उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की। इसके बाद गृह मंत्रालय ने प्रक्रिया पूरी की और बर्खास्तगी का प्रस्ताव भेजा।


आईएएस अधिकारियों की बर्खास्तगी के मामले

पद्मा जायसवाल का प्रशासनिक करियर दो दशकों से अधिक का रहा है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। भारत में आईएएस अधिकारियों को बर्खास्त करने या जबरन रिटायरमेंट देने के मामले बहुत कम होते हैं। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई उसी प्राधिकरण द्वारा की जाती है जो उनके कैडर का नियंत्रण करती है। भ्रष्टाचार के मामलों में अदालतें भी उसी चार्जशीट के आधार पर निर्णय देती हैं, जो जांच एजेंसियों द्वारा गहन जांच के बाद प्रस्तुत की जाती हैं।


अन्य बर्खास्तगी के मामले

पूजा खेडकर: सितंबर 2024 में केंद्र सरकार ने आईएएस की उम्मीदवारी में धोखाधड़ी और गलत तरीके से ओबीसी व दिव्यांग कोटे का लाभ उठाने के आरोप में पूजा खेडकर को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया था।