Newzfatafatlogo

केंद्रीय मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के लिए नए शुल्क नियम लागू किए

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के लिए नए शुल्क नियमों की घोषणा की है। ये नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होंगे और ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने और हाईवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। नए नियमों के तहत ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लिया जाएगा, और ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर की जाएगी। जानें इन नियमों के बारे में और कैसे ये सड़क परिवहन को सुरक्षित बनाएंगे।
 | 
केंद्रीय मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के लिए नए शुल्क नियम लागू किए

नई नियमावली का उद्देश्य

नई दिल्ली - केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने नेशनल हाईवे पर ओवरलोड वाहनों के लिए शुल्क से संबंधित नियमों में बदलाव करते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश 'नेशनल हाईवे फीस (रेट निर्धारण और संग्रह) चौथा संशोधन नियम, 2026' के तहत लागू किए गए हैं।


नए नियमों की प्रभावी तिथि

ये नए नियम 15 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे। इनका मुख्य उद्देश्य ओवरलोडिंग पर नियंत्रण, सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना और हाईवे के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया

नए नियमों के अनुसार, ओवरलोडिंग के प्रतिशत के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यदि कोई वाहन 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त वजन ले जा रहा है, तो उस पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन यदि वाहन 10 प्रतिशत से अधिक और 40 प्रतिशत तक ओवरलोड है, तो उसे बेस रेट का दोगुना शुल्क देना होगा। वहीं, 40 प्रतिशत से अधिक ओवरलोड वाले वाहनों पर बेस रेट का चार गुना शुल्क लगाया जाएगा।


ओवरलोडिंग की जांच

नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर लगे प्रमाणित वजन मापने वाले उपकरणों से की जाएगी। यदि किसी टोल प्लाजा पर वजन मापने की सुविधा नहीं है, तो वहां ओवरलोड शुल्क नहीं लिया जाएगा।


फास्टैग और वाहन रजिस्टर

इसके अलावा, ओवरलोडिंग शुल्क केवल फास्टैग के माध्यम से ही वसूला जाएगा, और ऐसे वाहनों की जानकारी राष्ट्रीय वाहन रजिस्टर में दर्ज की जाएगी। जो वाहन बिना वैध फास्टैग के नेशनल हाईवे पर प्रवेश करेंगे, उनके खिलाफ मौजूदा नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ये नए नियम कुछ निजी निवेश परियोजनाओं पर लागू नहीं होंगे, जब तक कि संबंधित कंपनी इन्हें अपनाने की सहमति न दे।


सरकार का दृष्टिकोण

सरकार ने शुल्क गणना को स्पष्ट करने के लिए उदाहरण भी दिए हैं, ताकि विभिन्न वाहनों के लिए ओवरलोड फीस कैसे तय होगी, यह समझना आसान हो सके। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से ओवरलोडिंग कम होगी, सड़कों को नुकसान कम पहुंचेगा और माल ढुलाई अधिक सुरक्षित और सुचारु तरीके से हो सकेगी। इसके साथ ही, डब्ल्यूआईएम (वेट-इन-मोशन) तकनीक के जरिए वाहनों का वजन चलते-फिरते ही मापा जा सकेगा, जिससे प्रक्रिया और भी आसान और पारदर्शी बनेगी।