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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इमिग्रेशन और वीज़ा योजना को 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इमिग्रेशन और वीज़ा योजना को 2031 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिसमें 1800 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य इमिग्रेशन और वीज़ा सेवाओं का आधुनिकीकरण करना है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करते हुए वैध यात्रियों को सुविधाएं प्रदान की जा सकें। इस परियोजना के तहत नई तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ता अनुभव में सुधार होगा। जानें इस योजना के विस्तार के पीछे के कारण और इसके महत्व के बारे में।
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इमिग्रेशन और वीज़ा योजना को 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी

इमिग्रेशन और वीज़ा योजना का विस्तार

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इमिग्रेशन, वीज़ा, विदेशियों के पंजीकरण और ट्रैकिंग योजना को 31 मार्च, 2026 के बाद भी जारी रखने की स्वीकृति दी है। यह योजना 31 मार्च 2031 तक पांच साल की अवधि के लिए लागू रहेगी, जिसके लिए 1800 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया गया है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मीडिया को बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य इमिग्रेशन और वीज़ा सेवाओं का आधुनिकीकरण करना है, ताकि एक सुरक्षित और एकीकृत सेवा वितरण ढांचा तैयार किया जा सके। इसका लक्ष्य वैध यात्रियों को सुविधाएं प्रदान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है। इस परियोजना को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 13 मार्च, 2010 को 1011 करोड़ रुपए के बजट के साथ मंजूरी दी थी।

2015 में इस परियोजना के बजट को संशोधित कर 638.90 करोड़ रुपए किया गया था। इसके कार्यान्वयन की समय सीमा को बढ़ाकर 31 मार्च, 2017 और फिर बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के 31 मार्च, 2021 तक बढ़ा दिया गया था। कुल संशोधित बजट 638.90 करोड़ रुपए के मुकाबले 613.28 करोड़ रुपए का खर्च आया था। मंत्रिमंडल ने 19 जनवरी, 2022 को इस परियोजना को 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक पांच साल की और अवधि के लिए जारी रखने की मंजूरी दी थी, जिसके लिए 1365 करोड़ रुपए का बजट रखा गया था। इस योजना का उद्देश्य मौजूदा IVFRT योजना के दायरे और क्षमता का विस्तार करना है। यह न केवल मौजूदा ढांचे को नए सिरे से तैयार करके और उसमें सुधार करके किया जाएगा, बल्कि सुरक्षा ढांचे से समझौता किए बिना उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी समाधान भी पेश किए जाएंगे। वैश्विक यात्रा की बदलती मांगों को पूरा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए IVFRT परियोजना का आधुनिकीकरण आवश्यक है। इमिग्रेशन और विदेशियों से जुड़े कानून 2025 और उसके बाद लागू होने वाले नियमों और आदेशों के मद्देनजर IVFRT सिस्टम को मजबूत और आधुनिक बनाना जरूरी हो गया है। यह कदम इमिग्रेशन नियंत्रण और विदेशियों के प्रबंधन के क्षेत्र में उभरती आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए उठाया गया है। इस परियोजना का निरंतरता केवल एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह भारत सरकार के उस दृष्टिकोण के अनुरूप एक रणनीतिक बदलाव है, जिसका उद्देश्य एक विश्व-स्तरीय इमिग्रेशन और वीज़ा जारी करने वाले सिस्टम के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय आवाजाही को बढ़ावा देना है।