केजरीवाल ने जज को हटाने की मांग की, परिवार के संबंधों का किया जिक्र
केजरीवाल की कानूनी लड़ाई
दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्ण कांता शर्मा को अपने मामले से हटाने के लिए अरविंद केजरीवाल ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई है। पहले उन्होंने कोर्ट में अपनी दलीलें पेश की थीं, और अब एक अतिरिक्त हलफनामा दायर कर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और जज के परिवार के बीच के संबंधों का उल्लेख किया है। केजरीवाल का तर्क है कि चूंकि जज के बच्चे तुषार मेहता के अधीन काम करते हैं, इसलिए जज का निष्पक्ष निर्णय देना कठिन होगा।
जज हटाने की दलील
जज स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष अपनी दलीलें पेश करते हुए, केजरीवाल ने यह भी कहा कि जज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लिया है, जिससे उन्हें न्याय मिलने में संदेह है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए अनुरोध किया कि उनके मामले की सुनवाई किसी अन्य बेंच को सौंप दी जाए।
एफिडेविट में क्या है?
केजरीवाल ने पत्रकार सौरव दास की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जज स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे ईशान शर्मा सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार के लिए नियुक्त वकील हैं। इसके अलावा, उनकी बेटी शांभवी शर्मा भी दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त वकील हैं।
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केजरीवाल ने यह भी बताया कि यह कोई नामित पद नहीं है, और इसके माध्यम से उन्हें सरकारी काम और विजिबिलिटी मिलती है। उन्होंने 13 सितंबर 2022 के एक नोटिफिकेशन का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में चलने वाले मामलों को विभिन्न पैनलों के वकीलों को सौंपा जा सकता है।
हितों का टकराव
केजरीवाल ने यह भी कहा कि सॉलिसिटर जनरल खुद उनके मामले में पेश हो रहे हैं और उनकी अपील का विरोध कर रहे हैं, जिससे हितों के टकराव का मामला बनता है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार के कई मामलों को जज स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे को सौंपा गया है। एक RTI के अनुसार, ईशान को 2023 में 2487, 2024 में 1784 और 2025 में 1633 मामले सौंपे गए हैं।
केजरीवाल ने इस मामले को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि 'परसेप्शन से फर्क पड़ता है।' इसी आधार पर उन्होंने जज स्वर्ण कांता शर्मा को उनके मामले से हटाने की मांग की है।
