केरल का नाम बदलने पर बहस: 'केरलम' की मांग पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ
राजनीतिक बहस का नया मोड़
नई दिल्ली: केरल का नाम आधिकारिक रूप से 'केरलम' करने की चर्चा ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। खबरें हैं कि केंद्रीय कैबिनेट इस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है। इससे पहले, केरल विधानसभा ने दो बार इस प्रस्ताव को पारित किया है, जिसमें संविधान में संशोधन कर राज्य का नाम उसकी मूल मलयालम वर्तनी के अनुसार दर्ज करने की मांग की गई थी। इस मुद्दे पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर की टिप्पणी ने बहस को और भी दिलचस्प बना दिया है।
केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से राज्य का नाम 'केरलम' करने का प्रस्ताव पारित किया था। तर्क यह है कि 'केरलम' ही मलयालम में राज्य का सही उच्चारण और लेखन है। प्रस्ताव में यह भी मांग की गई है कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में यही नाम मान्य हो। अब अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है।
शशि थरूर की टिप्पणी
शशि थरूर का सवाल
केरल का नाम बदलकर 'केरलम' किए जाने की चर्चाओं के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने व्यंग्यात्मक अंदाज में सवाल उठाया कि यदि राज्य का नाम आधिकारिक रूप से 'केरलम' हो जाता है, तो वहां के निवासियों के लिए प्रचलित अंग्रेज़ी शब्द 'Keralite' और 'Keralan' का क्या होगा? उन्होंने कहा कि 'Keralamite' शब्द किसी सूक्ष्म जीव जैसा लगता है, जबकि 'Keralamian' किसी दुर्लभ खनिज का नाम प्रतीत होता है।
All to the good, no doubt, but a small linguistic question for the Anglophones among us: what happens now to the terms “Keralite” and “Keralan” for the denizens of the new “Keralam”? “Keralamite” sounds like a microbe and “Keralamian” like a rare earth mineral…! @CMOKerala might…
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 24, 2026
नए शब्दों के चयन की प्रतियोगिता
'शब्दों के चयन के लिए एक प्रतियोगिता'
थरूर ने मजाक में सुझाव दिया कि @CMOKerala शायद इस बदलाव के बाद नए शब्दों के चयन के लिए एक प्रतियोगिता शुरू कर दे, ताकि लोगों से बेहतर और उपयुक्त सुझाव मिल सकें। दरअसल, केरल विधानसभा ने राज्य का नाम उसकी मूल मलयालम रूप 'केरलम' में दर्ज करने का प्रस्ताव पारित किया है और केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन की मांग की है, ताकि सभी भाषाओं में राज्य का नाम एक समान रूप से 'केरलम' किया जा सके। इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी है।
भाजपा का समर्थन
भाजपा ने किया समर्थन
केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चन्दशेखर ने नाम परिवर्तन का समर्थन किया है। उनका कहना है कि 'केरलम' राज्य की परंपराओं और संस्कृति को मजबूत पहचान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को नई दिशा और प्रदर्शन की राजनीति की जरूरत है।
सभी दलों की सहमति
सभी दल सहमत
दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर CPM, Congress और BJP तीनों दल एकमत नजर आ रहे हैं। पहले भी विधानसभा में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था। इससे स्पष्ट है कि नाम परिवर्तन को लेकर व्यापक राजनीतिक सहमति है।
आगे की राह
आगे की राह
अब सभी की नजरें केंद्रीय कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो संविधान संशोधन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। नाम बदले या न बदले, लेकिन 'केरलम' को लेकर छिड़ी बहस ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान को फिर से केंद्र में ला दिया है.
