केरल में डेंटल छात्र की आत्महत्या: जातीय उत्पीड़न और लोन रिकवरी का मामला
केरल में आत्महत्या का नया मामला
केरल में एक डेंटल छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जो रोहित वेमुला केस की याद दिलाता है। 26 वर्षीय नितिन राज आर एल ने कथित जातीय उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की, जिसमें लोन रिकवरी का भी एक पहलू शामिल है। कन्नूर डेंटल कॉलेज में पढ़ने वाले नितिन की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने दो शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई
डॉक्टर एमके राम और केटी संगीता नंबियार पर अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून की धारा 3(1)(R) और भारतीय दंड संहिता की धारा 108 के तहत मुकदमा चलाया गया है। धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है।
पुलिस की जानकारी
पुलिस कमिश्नर निधिन राज ने बताया कि नितिन ने दिसंबर-जनवरी में एक मोबाइल ऐप के माध्यम से लोन लिया था। लोन चुकाने में देरी होने पर लोन एजेंसी ने उन्हें बार-बार फोन करके परेशान किया। एजेंसी ने एक शिक्षक का नंबर भी प्राप्त कर लिया था और 10 अप्रैल को उस शिक्षक को भी फोन किया गया।
आत्महत्या का कारण
टीचर को जानकारी मिलने के बाद नितिन पर मानसिक दबाव बढ़ गया था। यह भी कहा जा रहा है कि नितिन मानसिक रूप से टूट गए थे, जो उनकी आत्महत्या का एक कारण हो सकता है। 10 अप्रैल को उन्हें कॉलेज कैंपस में एक पथरीली जगह पर गिरा हुआ पाया गया।
जातीय उत्पीड़न के आरोप
नितिन को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शाम 3:35 बजे उनकी मृत्यु हो गई। उनके परिवार ने आरोप लगाया कि कुछ फैकल्टी मेंबर ने नितिन को जातिवादी गालियां दीं और उन्हें लगातार परेशान किया। नितिन के तीन ऑडियो क्लिप भी सामने आए हैं, जिनमें वह इन आरोपों की पुष्टि कर रहे हैं।
कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
कॉलेज ने दोनों शिक्षकों को निलंबित कर दिया है और एक जांच समिति का गठन किया है। पुलिस ने एक सात सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, जिसमें साइबर विशेषज्ञ भी शामिल हैं। पुलिस नितिन के फोन की पूरी जांच कर रही है, जिसमें कॉल डिटेल्स, चैट्स और ऑडियो क्लिप्स की फॉरेंसिक जांच शामिल है। परिवार और अन्य छात्रों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। यह जांच अभी जारी है और पुलिस थिरुवनंतपुरम में नितिन के गांव भी जाएगी।
रोहित वेमुला केस का संदर्भ
रोहित वेमुला का मामला जातीय उत्पीड़न से जुड़ा था, जिसने देशभर में हंगामा मचाया था। हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कॉलर रोहित ने 17 जनवरी 2016 को विश्वविद्यालय परिसर में आत्महत्या की थी, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे। रोहित और उनके साथियों पर एक दक्षिणपंथी छात्र संगठन के नेता के साथ मारपीट का आरोप लगा था, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इस मामले ने संस्थानों में दलित उत्पीड़न के मुद्दों पर नई बहस को जन्म दिया।
