केरल में शिक्षक पर नाबालिग के यौन उत्पीड़न का आरोप: जानें पूरी कहानी
पलक्कड़ में गंभीर मामला
पलक्कड़: केरल के पलक्कड़ जिले के मलम्पुझा क्षेत्र में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर एक नाबालिग छात्र के साथ यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगा है। पुलिस ने रविवार को आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया। यह घटना लगभग तीन सप्ताह पहले हुई थी, लेकिन मामला हाल ही में उजागर हुआ।
आरोपी शिक्षक की पहचान
पुलिस के अनुसार, आरोपी का नाम अनिल है, जो कोल्लांगोड का निवासी है। वह मलम्पुझा के एक सरकारी स्कूल में प्राथमिक स्तर पर संस्कृत पढ़ाता था। आरोप है कि 29 नवंबर को उसने कक्षा 6 में पढ़ने वाले लगभग 12 वर्षीय छात्र को अपने घर बुलाया और वहां उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बाल यौन उत्पीड़न से संबंधित कानून के तहत मामला दर्ज किया है।
घटना का खुलासा
मामले का खुलासा कैसे हुआ
यह मामला 18 दिसंबर को तब सामने आया, जब पीड़ित बच्चे ने अपने एक सहपाठी को इस घटना के बारे में बताया। सहपाठी ने अपनी मां को सूचित किया, जिसने आगे पीड़ित के माता-पिता को जानकारी दी। इस प्रकार, परिवार को पूरे मामले की गंभीरता का पता चला, जिससे घटना के सामने आने में देरी हुई।
स्कूल प्रबंधन की कार्रवाई
स्कूल प्रबंधन की भूमिका
घटना की जानकारी मिलने के बाद अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से संपर्क किया। स्कूल प्रबंधन ने शिक्षक के खिलाफ आंतरिक कार्रवाई शुरू की और उसे नौकरी से हटा दिया। हालांकि, यह आरोप भी सामने आया कि स्कूल ने मामले की गंभीरता को समझने के बावजूद पुलिस को तुरंत सूचित नहीं किया। स्कूल अधिकारियों ने कहा कि जैसे ही उन्हें औपचारिक जानकारी मिली, उन्होंने आवश्यक कदम उठाए।
पुलिस की जांच और गिरफ्तारी
पुलिस जांच और गिरफ्तारी
इस बीच, केरल पुलिस की विशेष शाखा को इस घटना की सूचना मिली, जिसके बाद प्राथमिक जांच की गई और आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने पीड़ित बच्चे का बयान दर्ज किया और बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत मामला दर्ज किया। सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद मलम्पुझा पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि जानबूझकर कोई देरी नहीं की गई और जैसे ही आरोपों की पुष्टि हुई, शिक्षक को सेवा से हटा दिया गया। वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है और पीड़ित बच्चे को पूरा संरक्षण दिया जाएगा।
