कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: श्रद्धालुओं के लिए बढ़े खर्च
यात्रा के खर्च में वृद्धि
यात्रा किराये में 35 हजार रुपए की वृद्धि, अब खर्च करना होगे 2.09 लाख रुपए
Kailash Mansarovar Yatra 2026, नई दिल्ली: अगले महीने से शुरू होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है, लेकिन महंगाई का झटका भी महसूस हो रहा है। इस वर्ष जो श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा पर जाना चाहते हैं, उन्हें पहले से अधिक खर्च करना होगा।
इस साल यात्रा पर जाने वाले यात्रियों की संख्या में वृद्धि के साथ-साथ यात्रा के खर्च में भी 35 हजार रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस वृद्धि का कारण डॉलर की कीमत में इजाफा बताया गया है। पिछले वर्ष यात्रा का कुल खर्च लगभग 1.74 लाख रुपये था, जो इस वर्ष बढ़कर 2.09 लाख रुपये हो गया है। इसमें केएमवीएन को देय राशि 65 हजार रुपये होगी।
यात्रा का शेड्यूल
भारतीय विदेश मंत्रालय ने 2026 के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का शेड्यूल जारी कर दिया है। यह यात्रा जून से शुरू होकर अगस्त तक चलेगी। यात्रा के दौरान कुल 10 जत्थे रवाना किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक जत्थे में 50 श्रद्धालु होंगे। सरकार दो मार्गों से यात्रा के लिए जत्थे भेजेगी, जिससे कुल 20 जत्थे जा सकेंगे और एक हजार श्रद्धालु इस पवित्र स्थल के दर्शन कर सकेंगे।
भारत और चीन सरकार के सहयोग से इस यात्रा का संचालन किया जाएगा। मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 19 मई 2026 है, और समय सीमा के भीतर प्राप्त आवेदनों पर ही विचार किया जाएगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदू, बौद्ध, जैन और बॉन धर्मों के लिए एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसका इतिहास सृष्टि के आरंभ जितना पुराना माना जाता है। यह यात्रा तिब्बत (चीन) में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील तक की जाती है, जिसे दुनिया की सबसे कठिन और श्रद्धापूर्ण यात्राओं में से एक माना जाता है। भारत-चीन सीमा विवाद के कारण लंबे समय तक यह यात्रा बाधित रही, लेकिन 1981 से इसे पुनः शुरू किया गया। वर्तमान में यह यात्रा सामान्यत: जून से सितंबर के बीच आयोजित की जाती है।
जत्थों के मार्ग
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस साल की यात्रा के लिए दो मार्गों का चयन किया गया है। पहला मार्ग उत्तराखंड से होकर गुजरता है, जहां यात्री प्रसिद्ध लिपुलेख दर्रे को पार करके तिब्बत की सीमा में प्रवेश करेंगे। उत्तराखंड मार्ग के लिए कुल 10 बैच निर्धारित किए गए हैं, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 यात्री शामिल होंगे।
दूसरा मार्ग सिक्किम से होकर जाता है, जहां यात्री नाथूला दर्रे के जरिए अपनी मंजिल तक पहुंचेंगे। इस मार्ग के लिए भी 10 बैच तय किए गए हैं। इस प्रकार, दोनों मार्गों को मिलाकर कुल 1000 यात्री इस वर्ष भोलेनाथ के दर्शन कर सकेंगे।
