कॉकरोच जनता पार्टी: डिजिटल दुनिया में नया राजनीतिक आंदोलन
नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का उदय
नई दिल्ली, 21 मई। देश के डिजिटल प्लेटफॉर्म और राजनीतिक क्षेत्र में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नामक एक अनोखी पार्टी की चर्चा जोरों पर है। यह पार्टी, जो महज छह दिन पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत के एक विवादास्पद बयान के विरोध में बनी, ने सोशल मीडिया पर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। गुरुवार दोपहर 2 बजे तक, इस पार्टी के इंस्टाग्राम पर 1.34 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हो गए, जो किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल से अधिक है। वर्तमान में, कांग्रेस के 1.33 करोड़, भाजपा के 87 लाख और आम आदमी पार्टी के 87 लाख फॉलोअर्स हैं।
CJP को मिला बड़ा झटका
हालांकि, इस डिजिटल सफलता के बीच, गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे CJP को एक बड़ा झटका लगा। कंपनी ने CJP का 'X' (ट्विटर) अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया, जिस पर 1.93 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। एक्स ने बताया कि यह कार्रवाई भारत के स्थानीय नियमों या कानूनी शिकायतों के आधार पर की गई है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म
15 मई का विवादास्पद बयान इस राजनीतिक हलचल की शुरुआत 15 मई को हुई, जब CJI सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की। इस बयान से नाराज युवाओं ने सोशल मीडिया पर अपनी भड़ास निकाली। अभिजीत दीपके, जो अमेरिका की बॉस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन में मास्टर डिग्री कर रहे हैं, ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए युवाओं को एकजुट होने की अपील की।
CJP का अनोखा मैनिफेस्टो
कॉकरोच जनता पार्टी का आधिकारिक नारा 'सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक, लेजी' है। पार्टी की सदस्यता के लिए चार अनोखी योग्यताएं रखी गई हैं: बेरोजगारी, आलसी होना, ऑनलाइन रहने की लत, और प्रोफेशनली भड़ास निकालने की क्षमता। CJP ने अपने 5 सूत्रीय घोषणापत्र में कई कड़े वादे किए हैं, जैसे कि रिटायरमेंट के बाद किसी भी CJI को राज्यसभा का पद नहीं दिया जाएगा।
दिल्ली में आंदोलन का असर
कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन अब दिल्ली की सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। कुछ युवा कॉकरोच की पोशाक पहनकर यमुना किनारे सफाई अभियान चला रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य फिलहाल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के बीच राजनीतिक जागरूकता फैलाना है।
CJI की सफाई
16 मई को CJI सूर्यकांत ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी आम युवाओं के लिए नहीं थी, बल्कि उन लोगों के खिलाफ थी जो फर्जी डिग्रियों के सहारे पेशों में घुस आए हैं।
