कोलकाता हाईकोर्ट में आई-पीएसी मामले की सुनवाई के दौरान हंगामा, जज ने स्थगित की कार्यवाही
कोलकाता में अदालत परिसर में हंगामा
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट में आई-पीएसी (I-PAC) से संबंधित मामले की सुनवाई शुक्रवार को उस समय विवादों में आ गई जब अदालत परिसर में भारी हंगामा शुरू हो गया। वकीलों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई कि जज को अदालत कक्ष छोड़ना पड़ा और सुनवाई को स्थगित करना पड़ा।
अदालत में अव्यवस्था और जज की नाराजगी
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुव्रा घोष के समक्ष होनी थी। जैसे ही कार्यवाही शुरू होने वाली थी, बड़ी संख्या में वकील अदालत कक्ष में इकट्ठा हो गए। इस दौरान आपसी बहस ने जल्द ही धक्का-मुक्की का रूप ले लिया। न्यायमूर्ति घोष ने बार-बार शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन उनके निर्देशों का पालन नहीं हुआ।
सख्त चेतावनी का असर नहीं
जस्टिस घोष ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मामले से असंबंधित वकील पांच मिनट के भीतर अदालत कक्ष खाली कर दें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे स्वयं कार्यवाही छोड़ देंगी। हालांकि, इस चेतावनी के बावजूद स्थिति और बिगड़ गई। वकील इस बात पर बहस करने लगे कि कौन रुकेगा और कौन बाहर जाएगा, जिससे अफरातफरी और बढ़ गई।
सुनवाई स्थगित, जज ने अदालत छोड़ी
अदालत में बढ़ती भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए न्यायमूर्ति सुव्रा घोष ने गहरी नाराजगी जताई और अदालत कक्ष छोड़ दिया। इसके साथ ही आई-पीएसी मामले समेत प्रवर्तन निदेशालय (ED) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई 14 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी गई।
ईडी की याचिका
इस मामले में ईडी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की है। ईडी का आरोप है कि कोयला घोटाले से जुड़ी जांच के दौरान गुरुवार को आई-पीएसी कार्यालय और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर हुई छापेमारी में मुख्यमंत्री ने एजेंसी की कार्रवाई में हस्तक्षेप किया।
तृणमूल कांग्रेस का जवाब
तृणमूल कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई के खिलाफ जवाबी याचिका दाखिल की है। पार्टी ने मांग की है कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज तुरंत वापस किए जाएं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी की चुनावी रणनीति हासिल करने के लिए ईडी का दुरुपयोग कर रही है।
पुलिस में शिकायतें
ईडी और राज्य सरकार के बीच टकराव तब और गहरा गया, जब तृणमूल कांग्रेस ने केंद्रीय एजेंसी के खिलाफ दो अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराईं। इसके बाद कोलकाता पुलिस और बिधाननगर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
दस्तावेज हटाने का आरोप
ईडी ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि छापेमारी के दौरान जांच स्थलों से "महत्वपूर्ण दस्तावेज" और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटाए गए। वहीं, ममता बनर्जी ने शेक्सपियर सरानी और बिधाननगर थानों में अज्ञात ईडी अधिकारियों और सीआरपीएफ कर्मियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
बढ़ता राजनीतिक टकराव
आई-पीएसी मामले से जुड़ा यह विवाद अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। 14 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां इस हाई-प्रोफाइल मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है।
