क्या CISF का सदन में प्रवेश लोकतंत्र के लिए खतरा है? कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस का गंभीर आरोप
कांग्रेस पार्टी ने शुक्रवार को एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों को भेजा गया, जो लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक और अस्वीकार्य घटना है।
खड़गे का पत्र
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने उपसभापति को पत्र लिखकर इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने पत्र में लिखा, "हम इस बात से हैरान हैं कि जब सांसद जनहित के मुद्दों पर विरोध कर रहे थे, तब CISF के जवानों को वेल में भेजा गया। क्या संसद अब इस स्तर पर पहुँच चुकी है? यह अत्यंत आपत्तिजनक है और हम इसकी स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं।" खड़गे ने यह भी कहा कि भविष्य में जब विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाए, तो CISF के जवानों को संसद के वेल में प्रवेश न करने दिया जाए।
CISF का टेकओवर?
After the sudden and unprecedented resignation of the Chairman of the Rajya Sabha, we are now seeing the takeover of the chamber of the Council of States by the personnel of the CISF.
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) August 1, 2025
The Leader of the Opposition in the Rajya Sabha has just written to the Deputy Chairman, Rajya… pic.twitter.com/XjSodAlFiP
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम को और गंभीर बताते हुए इसे 'CISF द्वारा सदन का टेकओवर' कहा। उन्होंने लिखा, "सभापति के अप्रत्याशित इस्तीफे के बाद अब हम देख रहे हैं कि राज्यसभा के चैंबर में CISF के जवानों का प्रवेश हो रहा है। यह बेहद चौंकाने वाला है।"
सुरक्षा नियमों का पालन
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष को बोलने से नहीं रोका गया और राज्यसभा में पहले से ही कड़ी सुरक्षा व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा, "राज्यसभा में कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल हैं। किसी सांसद को बोलने से नहीं रोका गया। CISF ने हमें जानकारी दी है कि यदि कोई सदस्य तय सीमा पार करता है, तो कार्रवाई की जाएगी।"
CISF की सुरक्षा जिम्मेदारी
सरकार ने दिसंबर 2023 में संसद की समग्र सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF को सौंपी थी, जब संसद में एक बड़ा सुरक्षा उल्लंघन हुआ था। उस घटना में दो व्यक्ति लोकसभा की दर्शक दीर्घा से कूदकर नीचे आए थे और उन्होंने पीले रंग के धुएं के कैनिस्टर छोड़े थे।
विरोध का अधिकार
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि जब सांसद जनता से जुड़े मुद्दों पर आवाज़ उठा रहे हैं, तो सुरक्षा बलों का इस्तेमाल करके उन्हें डराना-धमकाना लोकतंत्र के खिलाफ है।