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क्या E. Jean Carroll पर लगे आरोपों के पीछे है राजनीतिक खेल? जानें पूरी कहानी

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली पूर्व कॉलम लेखिका E. Jean Carroll अब खुद कानूनी जांच का सामना कर रही हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने यह जांच शुरू की है कि क्या कैरोल ने ट्रंप के खिलाफ अपने सिविल मामलों में झूठी गवाही दी थी। इस मामले में कई राजनीतिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा हो रही है, जिसमें कैरोल के वित्तीय समर्थन और ट्रंप प्रशासन की भूमिका शामिल है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे की सच्चाई।
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क्या E. Jean Carroll पर लगे आरोपों के पीछे है राजनीतिक खेल? जानें पूरी कहानी

डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ आरोपों में नया मोड़


नई दिल्ली: अमेरिका की राजनीति में एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। पूर्व कॉलम लेखिका ई. जीन कैरोल, जिन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, अब खुद कानूनी जांच के घेरे में आ गई हैं। अमेरिकी न्याय विभाग ने कैरोल के खिलाफ एक जांच शुरू की है, जो इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या उन्होंने ट्रंप के खिलाफ अपने पिछले दो सिविल मामलों में अदालत में झूठी गवाही दी थी।


झूठी गवाही का मामला क्या है?

इस जांच का आधार 2022 में दिए गए एक बयान को बनाया गया है। उस समय 82 वर्षीय कैरोल ने अदालत में शपथ लेकर कहा था कि उन्हें इस मामले में लड़ने के लिए किसी बाहरी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। लेकिन बाद में यह सामने आया कि लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन ने उनके कानूनी खर्चों का एक बड़ा हिस्सा चुकाया था।


राजनीतिक आलोचना और जांच की पृष्ठभूमि

इस आपराधिक जांच का नेतृत्व इलिनोइस के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट के संघीय अभियोजक एंड्रयू एस. बोट्रोस कर रहे हैं, जिन्हें ट्रंप ने नियुक्त किया था। अमेरिकी कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इस मामले से खुद को अलग कर लिया है, जबकि वह पहले ट्रंप के निजी वकील रह चुके हैं। कानूनी विशेषज्ञ और विपक्षी नेता इस कदम की कड़ी आलोचना कर रहे हैं, उनका मानना है कि यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रेरणा से प्रेरित है।


हर्जाने का विवाद

ई. जीन कैरोल ने आरोप लगाया था कि 1996 में न्यूयॉर्क के एक डिपार्टमेंट स्टोर के ड्रेसिंग रूम में ट्रंप ने उनका यौन शोषण किया। जूरी ने ट्रंप को दीवानी तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। ट्रंप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कैरोल को 'नॉट माई टाइप' कहा, जिसके बाद कैरोल ने उन पर मानहानि का मुकदमा दायर किया। अदालत ने ट्रंप को दोषी मानते हुए कैरोल को 8 करोड़ 33 लाख डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया, जिसे ट्रंप ने ऊपरी अदालत में चुनौती दी है।