क्या अमेरिका ने भारत से ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए जमीन मांगी? जानें सच
सोशल मीडिया पर फैली अफवाह
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक भ्रामक दावा तेजी से फैल गया, जिसमें कहा गया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए भारत की भूमि का उपयोग करने की अनुमति मांगी है। इस दावे के चलते लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह से गलत और निराधार बताया है।
विदेश मंत्रालय का स्पष्टीकरण
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक फैक्ट-चेक अकाउंट के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। मंत्रालय ने लोगों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट और भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और ऐसे दावों से सतर्क रहें। इसे 'फेक न्यूज' करार देते हुए मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ओर से भारत की भूमि के सैन्य उपयोग के लिए कोई अनुरोध नहीं किया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट का संदर्भ
Fake News Alert!
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) March 21, 2026
Please stay alert against such false and baseless claims and posts on social media! pic.twitter.com/oKRc2kefAo
यह मामला एक पत्रकार की सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अमेरिका 'लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' (LEMOA) के तहत भारत से सैन्य सहयोग की संभावनाएं तलाश रहा है। पोस्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिमी भारत, विशेषकर कोंकण तट के आसपास, अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा सकता है। इसके साथ ही, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए संभावित हमले की अटकलें भी लगाई गईं।
वायरल दावे की सच्चाई
वायरल पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारतीय नौसेना के पास बड़े विमानवाहक पोत को ठहराने की क्षमता नहीं है, इसलिए अमेरिकी जहाज समुद्र में लंगर डालकर खड़ा रहेगा और वहीं से उसे रसद सहायता दी जाएगी। इस तरह की बातें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गईं, जिससे मामला और अधिक सनसनीखेज बन गया।
हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मंत्रालय का कहना है कि इस तरह की खबरों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है और इन्हें केवल अफवाह के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार ने लोगों को सलाह दी है कि वे किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें, ताकि गलत सूचना के प्रसार को रोका जा सके।
