क्या पीएम मोदी तोड़ेंगे नेहरू का रिकॉर्ड? जानें भारतीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक सफर
भारतीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक दिन
नई दिल्ली: भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 13 मई की तारीख एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह वही दिन है जब स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक हुई थी। इस अवसर को याद करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश साझा किया, जिससे देश में लोकतांत्रिक इतिहास और प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल पर नई चर्चाएं शुरू हो गईं। विशेष रूप से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लंबे कार्यकाल की तुलना फिर से चर्चा का विषय बन गई है।
लोकसभा अध्यक्ष का संदेश
ओम बिरला ने 13 मई को अपने संदेश में कहा कि यह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए गर्व का और ऐतिहासिक महत्व रखता है। उन्होंने बताया कि इसी दिन 1952 में पहली निर्वाचित लोकसभा की पहली बैठक हुई थी। यह दिन संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनभागीदारी पर आधारित नए भारत की मजबूत नींव का प्रतीक है। उनके इस संदेश ने देश के लोकतांत्रिक सफर और स्वतंत्र भारत में चुनी गई सरकारों की यात्रा पर लोगों का ध्यान फिर से केंद्रित कर दिया।
भारत का पहला आम चुनाव
कब हुआ था स्वतंत्र भारत का पहला आम चुनाव?
भारत में पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 के बीच आयोजित किया गया था। इसे भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शुरुआत माना जाता है। उस समय लोकसभा की 489 सीटों पर मतदान हुआ था। कांग्रेस पार्टी ने इस चुनाव में भारी बहुमत हासिल किया, जिसमें उसने 364 सीटों पर जीत दर्ज की। इसके बाद 17 फरवरी 1952 को पहली लोकसभा का औपचारिक गठन हुआ और 13 मई 1952 को पहली बैठक आयोजित की गई। इस बैठक को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बुलाया था।
नेहरू का रिकॉर्ड
जवाहरलाल नेहरू के नाम है सबसे लंबा लगातार निर्वाचित कार्यकाल
पहले आम चुनाव में जीत के बाद, जवाहरलाल नेहरू को कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। उन्होंने 14 मई 1952 को स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित सरकार के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। नेहरू 27 मई 1964 तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहे, जो लगभग 12 साल और 14 दिन का कार्यकाल है। यह रिकॉर्ड आज भी भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है।
पीएम मोदी का कार्यकाल
पीएम मोदी इस रिकॉर्ड को तोड़ने के करीब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी उनके नेतृत्व में एनडीए को जीत मिली, जिससे वे लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। यदि उनका कार्यकाल इसी तरह जारी रहता है, तो 9 जून 2026 को वे लगातार 12 साल और 15 दिन तक निर्वाचित प्रधानमंत्री रह चुके होंगे, और इस तरह वे नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ देंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह भारतीय राजनीति में एक बड़ा ऐतिहासिक क्षण होगा।
नेहरू का प्रधानमंत्री बनने का सफर
1947 में कैसे प्रधानमंत्री बने थे नेहरू?
जवाहरलाल नेहरू पहली बार 15 अगस्त 1947 को भारत के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उस समय देश में आम चुनाव नहीं हुए थे। उन्हें कांग्रेस पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया था। इतिहासकारों के अनुसार, महात्मा गांधी की भूमिका भी नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण रही थी। 1947 से 1952 तक नेहरू मनोनीत प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करते रहे, और बाद में 1952 के आम चुनाव में जीत के बाद वे लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री बने।
