क्या भारत पर अमेरिका के नए रूस प्रतिबंध का असर पड़ेगा? जानें पूरी कहानी
भारत का सतर्क रुख
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कांग्रेस में पेश किए गए द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को समर्थन मिलने के संकेतों के बीच, भारत ने इस मुद्दे पर सतर्कता बरतने का निर्णय लिया है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिका को यह अधिकार मिल सकता है कि वह रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत, चीन और ब्राजील पर 500 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगा सके। भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह इस विधेयक से संबंधित सभी पहलुओं पर बारीकी से नजर रख रहा है।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि भारत को इस विधेयक और अमेरिका में चल रही चर्चाओं की पूरी जानकारी है। उन्होंने कहा कि भारत सभी मुद्दों और संभावित घटनाक्रमों को गंभीरता से देख रहा है। जायसवाल ने यह भी बताया कि भारत जल्दबाजी में कोई प्रतिक्रिया नहीं देना चाहता, बल्कि तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगा।
भारत की ऊर्जा नीति
जायसवाल ने भारत की ऊर्जा नीति के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा स्रोतों का चयन वैश्विक बाजार की स्थितियों और अंतरराष्ट्रीय माहौल को ध्यान में रखकर करता है। देश की प्राथमिकता यह है कि 1.4 अरब की जनसंख्या को किफायती दरों पर ऊर्जा उपलब्ध कराई जाए। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए भारत अपनी ऊर्जा नीतियों का निर्माण करता है।
अमेरिका में प्रस्तावित विधेयक
यह बयान उस समय आया है जब रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिस पर वह लंबे समय से काम कर रहे थे। ग्राहम के अनुसार, यह विधेयक रूस पर दबाव बढ़ाने और यूक्रेन युद्ध को लेकर सख्त रुख अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव
ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा कि यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप को उन देशों के खिलाफ कड़ा कदम उठाने की शक्ति देगा, जो सस्ता रूसी तेल खरीदकर रूस की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत, चीन और ब्राजील का उल्लेख किया और कहा कि इन देशों पर आर्थिक दबाव बनाया जाएगा ताकि वे रूस से तेल की खरीद बंद करें।
यूक्रेन युद्ध का संदर्भ
ग्राहम का तर्क है कि यूक्रेन शांति के लिए समझौते की कोशिश कर रहा है, जबकि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन केवल बातचीत का दिखावा कर रहे हैं। ऐसे में, रूस की आय के प्रमुख स्रोतों पर चोट करना आवश्यक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विधेयक पर कांग्रेस में दोनों दलों का समर्थन मिलेगा और संभवतः अगले सप्ताह की शुरुआत में इस पर मतदान हो सकता है।
भारत के लिए यह मुद्दा क्यों महत्वपूर्ण है
यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो यह भारत के लिए एक संवेदनशील आर्थिक और कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करनी है और साथ ही अमेरिका जैसे रणनीतिक साझेदार के साथ संबंधों का संतुलन भी बनाए रखना होगा। यही कारण है कि भारत हर कदम को सावधानी से तौल रहा है।
