क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की रुकावट वैश्विक ऊर्जा संकट का संकेत है?
नई दिल्ली में ऊर्जा बाजार में हलचल
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही में अचानक आई रुकावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। पहली नजर में यह स्थिति युद्ध जैसी प्रतीत हो सकती है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सैन्य तनाव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण जियोपॉलिटिकल रणनीति की शुरुआत हो सकती है।
संकट की जड़ें
एक ऊर्जा अर्थशास्त्री के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा तंत्र अब 'अनदेखे क्षेत्रों' में प्रवेश कर चुका है। इसका मुख्य कारण यह है कि बीमा कंपनियों ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट से गुजरने वाले जहाजों के लिए युद्ध जोखिम कवरेज अचानक वापस ले लिया है।
विशेषज्ञ ने बताया कि हम क्रूड ऑयल, रिफाइंड उत्पादों, एलएनजी, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, मेथनॉल और अन्य पेट्रोलियम डेरिवेटिव्स के साथ कई ऊर्जा और कमोडिटी बाजारों में नए क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
बीमा संकट का प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, इस संकट का कारण ईरान का सीधा हमला नहीं था, बल्कि एक वित्तीय झटका था, जिसने शिपिंग गतिविधियों को लगभग रातों-रात ठप कर दिया। बीमा कवरेज के अचानक हटने या प्रीमियम में भारी वृद्धि के कारण जहाज मालिकों ने जोखिम उठाने से मना कर दिया।
ऐतिहासिक स्थिति
अर्थशास्त्री के अनुसार, बड़ी यूरोपीय और वैश्विक बीमा कंपनियों ने अचानक होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के लिए युद्ध जोखिम कवरेज रद्द कर दिया या इतना महंगा कर दिया कि संचालन असंभव हो गया। उन्होंने कहा, 'किसी ने भी इसकी उम्मीद नहीं की थी। हालाँकि पिछले दशकों में दुनिया ने शिपिंग में रुकावटें देखी हैं, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।'
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है, जहाँ दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 15 से 20 प्रतिशत और एलएनजी शिपमेंट का करीब 20 प्रतिशत इसी संकरे जलमार्ग से गुजरता है, जो फारस की खाड़ी को वैश्विक बाजार से जोड़ता है।
ट्रंप की चुप्पी पर सवाल
तेल की ऊंची कीमतों की अक्सर आलोचना करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बीमा संकट पर अब तक चुप हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह रुकावट ईरानी सैन्य कार्रवाई से कम और वैश्विक वित्तीय तंत्र के अंदर लिए गए फैसलों का नतीजा ज्यादा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है।
