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क्वॉड देशों की बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति पर चर्चा

क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में एक बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए 20 बिलियन डॉलर जुटाने का निर्णय लिया। इस बैठक में भारत और अमेरिका ने खनन, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की। अमेरिका की वित्तीय प्रणाली में ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन यदि सही वित्तीय संसाधन जुटाए जाते हैं, तो दुनिया चीन पर निर्भरता से मुक्त हो सकती है।
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क्वॉड देशों की बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति पर चर्चा

क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति शृंखला पर ध्यान केंद्रित


क्वॉड देशों के विदेश मंत्रियों की हालिया बैठक में आधुनिक उद्योगों के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने मिलकर 20 बिलियन डॉलर की राशि जुटाने का निर्णय लिया है, ताकि क्रिटिकल मिनरल्स की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, भारत और अमेरिका ने इस दिशा में एक विशेष समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें खनन, प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग के लिए सहयोग का आश्वासन दिया गया है।


छह महीने पहले, अमेरिका ने ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस युग के लिए सुरक्षित एवं विश्वसनीय आपूर्ति शृंखला’ स्थापित करने के लिए पैक्स सिलिका नामक पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका के लिए रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन खनिजों की प्रोसेसिंग की लगभग 90 प्रतिशत क्षमता केवल चीन के पास है, जिससे वह अन्य देशों की सामरिक योजनाओं पर प्रभाव डालने में सक्षम है।


हालांकि, इन खनिजों से उपयोगी उत्पाद बनाना एक जटिल और महंगा कार्य है, जो पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा सकता है। अमेरिका की वित्तीय प्रणाली में ऐसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करना कठिन हो गया है, जिनमें दीर्घकालिक लाभ की संभावना होती है। इसलिए, अमेरिका अब विभिन्न समझौतों के माध्यम से वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इन समझौतों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि क्या ऐसे वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं, जो त्वरित लाभ की अपेक्षा नहीं करते।