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खाने की थाली की कीमतों में वृद्धि: टमाटर और एलपीजी का असर

खाने की थाली की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसका मुख्य कारण टमाटर, वनस्पति तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतें हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, मांसाहारी और शाकाहारी थाली की लागत में हर साल 2 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। दक्षिण भारत में टमाटर की खेती में कमी और अन्य सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी इस महंगाई में योगदान दे रहे हैं। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है।
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खाने की थाली की कीमतों में वृद्धि: टमाटर और एलपीजी का असर

महंगाई का असर

देशभर में खाने की थाली की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि टमाटर, वनस्पति तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतें इस पर प्रभाव डाल रही हैं। क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के अनुसार, मांसाहारी और शाकाहारी थाली की लागत में हर साल 2 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है।


टमाटर की खेती में कमी

रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि दक्षिण भारत में टमाटर की खेती का क्षेत्रफल बहुत कम है, जिसके कारण उत्पादन में 3 से 4 प्रतिशत की कमी आई है। अप्रैल में टमाटर की कीमतें 20 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गईं, जबकि पिछले वर्ष इसी समय यह 21 रुपये प्रति किलो था। कीमतों में लगभग 38 प्रतिशत की वृद्धि ने थाली की लागत को प्रभावित किया है, हालांकि आलू, प्याज और दाल की कम कीमतों ने कुछ राहत दी है।


टमाटर की कीमतों में संभावित वृद्धि

क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुष्पन शर्मा का कहना है कि टमाटर की कीमतें निकट भविष्य में महत्वपूर्ण निगरानी का विषय रहेंगी। जुलाई और अगस्त के बीच कीमतों में वृद्धि की संभावना है, खासकर उत्तर के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में लू के कारण बुवाई में कमी के चलते।


एलपीजी और वनस्पति तेल की महंगाई

वेस्ट एशिया में संकट के चलते एलपीजी और वनस्पति तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। सिलेंडर की कीमतों में सालाना 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे खाना पकाने का खर्च भी बढ़ा है। हालांकि, पिछले महीने की तुलना में शाकाहारी थाली की कीमत में कोई बदलाव नहीं आया है, जबकि अप्रैल में मांसाहारी थाली की कीमत में 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।


प्याज और आलू की कीमतों में गिरावट

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने बताया कि प्याज की कीमतों में साल दर साल 16 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका कारण खरीफ और रबी फसल का एक साथ आना है। आलू की पैदावार में 2 से 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे कोल्ड स्टोरेज में रखे आलू की कीमतों में 14 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।


नॉनवेज थाली की कीमतों में वृद्धि के कारण

टैरिफ मुक्त तुअर की दाल के आयात से उसकी कीमतों में 4 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, ब्रॉयलर की कीमतों में वृद्धि के कारण नॉनवेज थाली भी महंगी हो गई है। गर्मी के कारण मुर्गियों की मृत्यु दर में वृद्धि और आपूर्ति में कमी इसका मुख्य कारण है।