Newzfatafatlogo

गंगा जल बंटवारा संधि का नवीकरण: भारत-बांग्लादेश के बीच जल स्तर मापन की प्रक्रिया शुरू

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि का नवीकरण प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। दोनों देशों ने गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर मापन का कार्य आरंभ किया है, जो भविष्य की जल साझेदारी के लिए महत्वपूर्ण है। इस प्रक्रिया के तहत हर 10 दिन में जल स्तर का डेटा एकत्र किया जाएगा। जानें इस संधि का ऐतिहासिक महत्व और दोनों देशों की जल आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिशों के बारे में।
 | 
गंगा जल बंटवारा संधि का नवीकरण: भारत-बांग्लादेश के बीच जल स्तर मापन की प्रक्रिया शुरू

गंगा जल बंटवारे की संधि पर नई हलचल


नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल बंटवारा संधि को लेकर गतिविधियाँ फिर से तेज हो गई हैं। यह महत्वपूर्ण संधि, जो दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, के नवीकरण की प्रक्रिया औपचारिक रूप से आरंभ हो चुकी है। इस संदर्भ में, दोनों देशों ने गंगा और पद्मा नदियों में जल स्तर मापन का कार्य शुरू कर दिया है।


यह मापन न केवल संधि के नियमों के अनुसार किया जा रहा है, बल्कि भविष्य की जल साझेदारी के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रक्रिया 31 मई तक चलेगी और हर 10 दिन में जल स्तर का डेटा एकत्र किया जाएगा।


तकनीकी तैयारी में तेजी

1996 में हस्ताक्षरित गंगा जल बंटवारा संधि अब अपने अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। इस स्थिति में, दोनों देशों ने तकनीकी तैयारी को तेज कर दिया है। भारतीय केंद्रीय जल आयोग (CWC) के उप निदेशक सौरभ कुमार और सहायक निदेशक सनी अरोड़ा इस समय बांग्लादेश में हैं, जबकि बांग्लादेश जल विकास बोर्ड की चार सदस्यीय टीम भारत में है, जिसका नेतृत्व कार्यकारी इंजीनियर अरिफिन जुबेद कर रहे हैं।


संयुक्त मापन कार्य भारत में फरक्का बैराज और बांग्लादेश में हार्डिंग ब्रिज के पास पद्मा नदी पर लगभग 3,500 फीट ऊँचाई पर निर्धारित बिंदु पर किया जा रहा है।


पद्मा नदी पर विशेष ध्यान

पद्मा नदी, जो भारत से बांग्लादेश में प्रवेश करती है, गंगा की मुख्य धारा के रूप में जानी जाती है। इसका जल स्तर बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों की कृषि और आजीविका के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसलिए, इस मापन प्रक्रिया को दोनों देशों के लिए संवेदनशील और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।


बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शिब्बर हुसैन ने बताया कि भारतीय दल की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। जल संसाधन मंत्रालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है।


1996 की गंगा जल संधि का महत्व

1996 में हुई गंगा जल बंटवारा संधि भारत और बांग्लादेश के बीच एक ऐतिहासिक समझौता है। यह संधि सूखे मौसम में, यानी जनवरी से मई के बीच, फरक्का बैराज पर गंगा के जल के बंटवारे को नियंत्रित करती है। इस समझौते ने दशकों पुराने जल विवाद को काफी हद तक सुलझाया था।


हालांकि, समय के साथ परिस्थितियाँ बदल गई हैं। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती सिंचाई की आवश्यकताएँ और नई विकास परियोजनाओं ने दोनों देशों की अपेक्षाओं को प्रभावित किया है।


भारत और बांग्लादेश की प्राथमिकताएँ

भारत सिंचाई, बिजली उत्पादन और बंदरगाहों के रखरखाव जैसी बढ़ती जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संधि में संशोधन की इच्छा रखता है, जबकि बांग्लादेश सूखे मौसम में अधिक जल हिस्सेदारी की मांग कर रहा है। बांग्लादेश का कहना है कि कम पानी मिलने से उसके दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्रों में कृषि और जनजीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।


54 साझा नदियों पर सहयोग की संभावनाएँ

भारत और बांग्लादेश के बीच 54 साझा नदियाँ हैं, लेकिन अभी केवल कुछ ही नदियों पर औपचारिक समझौते मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा जल संधि का नवीकरण जलवायु-प्रतिरोधी और अधिक संतुलित जल प्रबंधन मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


मापन प्रक्रिया के नियम

संधि के प्रावधानों के अनुसार, दोनों देश 1 जनवरी से 31 मई तक गंगा और पद्मा नदियों के निर्धारित बिंदुओं पर जल स्तर का मापन करेंगे। हर 10 दिन का डेटा साझा किया जाएगा, जो आगे की बातचीत और नवीकरण की नींव बनेगा।