गणतंत्र दिवस 2024: 10,000 विशिष्ट नागरिकों की भागीदारी से होगा समारोह और भी खास
समावेशी गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी
नई दिल्ली : इस वर्ष आयोजित होने वाले 77वें गणतंत्र दिवस समारोह को और अधिक समावेशी और जनकेंद्रित बनाने की योजना बनाई गई है। सरकार ने देश के विभिन्न हिस्सों से लगभग 10,000 विशिष्ट नागरिकों को इस ऐतिहासिक अवसर पर आमंत्रित किया है। इनमें किसान, श्रमिक, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, शोधकर्ता और उद्यमी शामिल हैं, जिन्होंने अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को राष्ट्रीय मंच
सरकार का ध्यान इस बार उन इनोवेटर्स, स्टार्ट-अप्स, और स्वयं सहायता समूहों पर है, जिन्होंने आय और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया है और दूसरों के लिए प्रेरणा बने हैं।
प्रेरणादायक चेहरे खेल, विज्ञान और कृषि से
खेल, विज्ञान और कृषि से जुड़े प्रेरणादायक चेहरे
विशिष्ट मेहमानों की सूची में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के पदक विजेता, प्राकृतिक खेती करने वाले किसान, और इसरो के गगनयान और चंद्रयान जैसे अभियानों में योगदान देने वाले वैज्ञानिक शामिल हैं। इन सभी को उनके योगदान के लिए इस राष्ट्रीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
स्वास्थ्य और शिक्षा में उत्कृष्टता को मिलेगा मान
स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार को भी मिला सम्मान
इस बार स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले पेशेवरों को भी आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, लोक कलाकार, गायक, और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत सफल व्यवसाय स्थापित करने वाली महिलाएं भी समारोह में शामिल होंगी। यह पहल समाज के सभी वर्गों की भागीदारी को दर्शाती है।
नागरिकों की भागीदारी को मिलेगी नई पहचान
राष्ट्र निर्माण में भागीदारी को मिलेगी नई पहचान
सरकार का मानना है कि इस तरह के आमंत्रण से न केवल इन व्यक्तियों के योगदान को मान्यता मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय आयोजनों में आम नागरिकों की भागीदारी भी बढ़ेगी। यह कदम लोकतंत्र को और अधिक सहभागी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
विशिष्ट अतिथियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
खास मेहमानों के लिए विशेष व्यवस्थाएं
कर्तव्य पथ पर इन विशिष्ट अतिथियों के लिए अलग और विशेष बैठने की व्यवस्था की गई है। परेड के बाद, उनके लिए दिल्ली भ्रमण और केंद्रीय मंत्रियों से संवाद का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, ताकि वे शासन और नीति निर्माण की प्रक्रिया से सीधे जुड़ सकें।
वीआईपी संस्कृति से दूरी
VIP कल्चर से दूरी, नदियों के नाम पर दीर्घाएं
इस बार रक्षा मंत्रालय ने वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दर्शक दीर्घाओं का नामकरण भारत की प्रमुख नदियों के नाम पर किया गया है, जैसे गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, कावेरी, नर्मदा, सतलुज, तीस्ता, और महानदी। ये दीर्घाएं देश की सांस्कृतिक एकता और प्राकृतिक विरासत का प्रतीक बनेंगी।
