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गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था: खालिस्तानी और आतंकियों का खतरा बढ़ा

गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि खालिस्तानी आतंकवादी संगठन और अन्य आतंकी समूह हमले की योजना बना रहे हैं। इस बार सुरक्षा में AI तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें स्मार्ट चश्मे और फेस रिकग्निशन कैमरे शामिल हैं। सुरक्षा व्यवस्था को तीन स्तरों में विभाजित किया गया है, जिसमें 20,000 जवान तैनात किए गए हैं। जानें इस बार की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में और क्या-क्या नए उपाय किए गए हैं।
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गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था: खालिस्तानी और आतंकियों का खतरा बढ़ा

सुरक्षा सतर्कता का बढ़ता स्तर


नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि खालिस्तानी आतंकवादी समूह, जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा के सदस्य इस दिन हमले की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठन भी हमले की तैयारी में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के कुछ गैंगस्टर विदेश में स्थित कट्टरपंथियों और खालिस्तानी हैंडलरों के साथ मिलकर इस योजना को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं।


सुरक्षा एजेंसियों का अलर्ट

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ये गैंगस्टर हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सक्रिय हैं और उनके पास देशी और विदेशी हथियारों की बड़ी मात्रा मौजूद है। खुफिया जानकारी में बताया गया है कि विदेशी हैंडलर इन गैंगस्टरों के नेटवर्क का उपयोग अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए, दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां और अर्धसैनिक बल सुरक्षा को और मजबूत कर रहे हैं।


AI तकनीक से सुसज्जित सुरक्षा उपाय

इस बार गणतंत्र दिवस की सुरक्षा में तकनीकी नवाचारों का भरपूर उपयोग किया गया है। पुलिसकर्मियों को AI से लैस स्मार्ट चश्मे प्रदान किए गए हैं, जो संदिग्धों की पहचान करते ही अलर्ट भेजेंगे। फेस रिकग्निशन कैमरे पूरे परेड रूट और नई दिल्ली के 31 सीसीटीवी कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं, जिनमें 1000 उच्च-परिभाषा कैमरे शामिल हैं। यह प्रणाली केवल संदिग्ध आतंकियों और अपराधियों के फोटो पर ही नहीं, बल्कि अज्ञात व्यक्तियों पर भी अलर्ट भेजेगी।


मल्टी-लेयर सुरक्षा व्यवस्था

नई दिल्ली के एडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस देवेश महला ने बताया कि परेड रूट की सुरक्षा के लिए कुल 20,000 जवान तैनात किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को तीन मुख्य स्तरों में विभाजित किया गया है।


पहली लेयर: कर्तव्य पथ के बाहरी सुरक्षा घेरे में 15,000 पुलिसकर्मी और अर्धसैनिक बल, बम डिस्पोजल, ट्रैफिक टीम और क्विक रिस्पॉन्स टीम शामिल हैं।


दूसरी लेयर: अर्धसैनिक बलों की तैनाती, राष्ट्रपति भवन से लेकर लाल किले तक रणनीतिक स्थानों पर सुरक्षा।


तीसरी लेयर: एनएसजी कमांडो, सेना और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अधिकारी, जो वीवीआईपी और अतिथियों की सुरक्षा के साथ आसपास की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।


सेंट्रल कमांड और ड्रोन सुरक्षा

एक केंद्रीय कमांड रूम स्थापित किया गया है, जो पूरे शहर की निगरानी करता है। एनएसजी का डॉग स्क्वायड भी सुरक्षा में तैनात रहेगा। परेड रूट के आसपास की ऊंची इमारतों को 25 जनवरी से खाली कर दिया जाएगा और 100 से अधिक स्नाइपर तैनात किए जाएंगे। ड्रोन या अन्य उड़ने वाली वस्तुओं पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा, एंटी-ड्रोन और एंटी-एयरक्राफ्ट गन भी तैनात की गई हैं।


फेस रिकग्निशन और हाईटेक निगरानी

सीसीटीवी कैमरे 50,000 संदिग्धों और आतंकियों की फोटो से जुड़े हैं। किसी भी व्यक्ति का चेहरा मेल खाते ही पुलिस को तुरंत अलर्ट मिलेगा। कैमरों को इस तरह से रणनीतिक स्थानों पर स्थापित किया गया है कि उनका पकड़ से बचना लगभग असंभव है। पुलिस ने कर्तव्य पथ पर कई मॉक ड्रिल भी कर ली हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो सके।