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गणेश चतुर्थी: मुंबई में भक्ति और सामाजिक समर्पण का पर्व

गणेश चतुर्थी का त्योहार मुंबई में भक्ति और सामाजिक समर्पण का प्रतीक है। हर साल लाखों भक्त लालबागचा राजा के दर्शन के लिए आते हैं, और इस दौरान दान-पुण्य की गतिविधियाँ भी बढ़ जाती हैं। इस वर्ष भी पहले दिन से चढ़ावे की गिनती ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। जानें इस पर्व का महत्व, इतिहास और पर्यावरण के प्रति जागरूकता की पहल के बारे में।
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गणेश चतुर्थी: मुंबई में भक्ति और सामाजिक समर्पण का पर्व

गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश चतुर्थी का त्योहार मुंबई में केवल भक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समर्पण और सामूहिक विश्वास का एक अद्वितीय उदाहरण भी है। हर साल लाखों भक्त लालबागचा राजा के दर्शन के लिए आते हैं, और इस दौरान दान-पुण्य की गतिविधियाँ भी बढ़ जाती हैं। इस वर्ष भी पहले दिन से चढ़ावे की गिनती ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है।


दान की गिनती की प्रक्रिया

मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल में पहले दिन के दान की गिनती शुरू हो गई है। मंडल के कोषाध्यक्ष मंगेश दत्ताराम दलवी ने बताया कि पहले दिन तीन दानपात्र रखे गए थे, जिनमें से एक को खोला जा चुका है। उन्होंने कहा कि गिनती की प्रक्रिया जारी है और इसके लिए 80 लोगों की एक टीम नियुक्त की गई है। पिछले साल पहले दिन लगभग 48 लाख रुपये का चढ़ावा मिला था, और इस बार भी भक्तों की आस्था को देखते हुए उम्मीद है कि यह आंकड़ा और बढ़ेगा।


लालबागचा राजा का पहला दर्शन

लालबागचा राजा का पहला दर्शन 24 अगस्त की शाम को हुआ। इस बार भी मूर्ति अपनी भव्यता और कलात्मकता से भक्तों को आकर्षित कर रही है। लालबागचा राजा केवल एक गणेश प्रतिमा नहीं है, बल्कि यह मुंबई की पहचान और करोड़ों भक्तों की आस्था का प्रतीक है। हर साल यहां लाखों लोग आते हैं और घंटों कतार में खड़े होकर बप्पा के दर्शन करते हैं। इस दौरान श्रद्धालु न केवल अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं, बल्कि समाज के लिए दान और सेवा के माध्यम से योगदान भी करते हैं.


इतिहास और परंपरा

लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 1934 में हुई थी। यह मंडल पुतलाबाई चाल में स्थापित किया गया था और तब से यह गणेशोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है। पिछले आठ दशकों से इस गणेश प्रतिमा की देखभाल कांबली परिवार द्वारा की जा रही है, जिससे यह लालबागचा राजा आज मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश और विदेश में रहने वाले भक्तों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है।


पर्यावरण के प्रति जागरूकता

जहां भक्ति और आस्था की लहर दिखाई देती है, वहीं पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ी है। पिछले एक दशक से मुंबई के शिल्पकार गणपति की मूर्तियां इको-पेपर से बना रहे हैं। इन मूर्तियों की विशेषता यह है कि ये हल्की होती हैं, टूटती नहीं, पानी में आसानी से घुल जाती हैं और पूरी तरह से रिसाइकिल की जा सकती हैं। यह पहल भक्तों को धार्मिक आस्था से जोड़ने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।


गणेश चतुर्थी का उत्सव

गणेश चतुर्थी का यह दस दिवसीय उत्सव भाद्रपद माह की चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलता है। इसे विनायक चतुर्थी या विनायक चविथि भी कहा जाता है। यह उत्सव गणपति को 'नई शुरुआत के देवता', 'विघ्नहर्ता' और 'बुद्धि व ज्ञान के देवता' के रूप में मनाने का पर्व है। मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में यह त्योहार पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है।