गर्मी की लहर: 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही गर्म हवाएं
गर्मी का प्रभाव और स्वास्थ्य पर असर
- गर्मी का प्रभाव पशुओं पर भी, दूध उत्पादन में कमी
- अधिकतम तापमान 41 डिग्री, राहत की कोई उम्मीद नहीं
गर्मी की लहर (जींद)। मौसम की गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 41 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम में आद्रता 19 प्रतिशत और हवा की गति 16 किलोमीटर प्रति घंटे रही। मौसम विभाग के अनुसार, गर्मी से राहत मिलने की कोई संभावना नहीं है। चिकित्सकों ने लोगों को सलाह दी है कि वे अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें, स्वच्छता का ध्यान रखें और शरीर को ढककर रखें।
गर्मी का असर और बाजार की स्थिति
गर्मी के कारण बाहर निकलने से बचें। पशुओं पर भी गर्मी का असर पड़ रहा है, जिससे दूध उत्पादन में कमी आ रही है। दोपहर के समय सड़कों और गलियों में वीरानी छा गई है, और बाजार भी सुनसान नजर आ रहे हैं। हालांकि, शुक्रवार को अधिकतम तापमान में दो डिग्री की गिरावट आई। इसके अलावा, दिन और रात में बिजली कटौती ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
गर्मी से बचने के उपाय
पंखे और कूलर का सहारा
पिछले चार दिनों से तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जो 44 डिग्री तक पहुंच गया है। इसका जनजीवन पर गहरा असर पड़ा है। गर्मी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहे हैं, और दिन चढ़ने के साथ ही मौसम और गर्म होता जा रहा है।
गर्मी की तेज हवाओं ने लोगों को परेशान कर दिया है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. राजेश ने बताया कि फिलहाल गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। तापमान में और वृद्धि की संभावना है, हालांकि बीच-बीच में आंशिक बादल भी दिखाई दे सकते हैं। नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने कहा कि गर्मी के कारण कोई भी प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि लोग तेज धूप में बाहर न निकलें और अधिक से अधिक तरल पदार्थ लें।
पशुओं की देखभाल
पशुओं की देखभाल का महत्व
गर्मी अपने चरम पर है और दैनिक तापमान 44 डिग्री तक पहुंच रहा है। ऐसे में पशुओं की देखभाल करना भी आवश्यक है। गर्मी में दूध उत्पादन कम हो रहा है, लेकिन उचित देखभाल से इस कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है। उपमंडल अधिकारी पशुपालन एवं डेयरी विभाग, डॉ. सुरेंद्र आर्य ने कहा कि गर्मी में दूध उत्पादन पर अधिक असर पड़ता है। पशुपालकों को चाहिए कि वे अपने पशुओं को गर्मी से बचाने के उपाय करें।
पशुओं के लिए उचित व्यवस्था
डॉ. सुरेंद्र आर्य ने बताया कि पशुओं को भी हीट स्ट्रेस होता है। दूध उत्पादन में कमी का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन है। पशुओं को पानी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि वे समय पर पानी पी सकें। गर्मी के मौसम में पशुओं के बाड़े को इस तरह से बनाना चाहिए कि वहां सीधी धूप न आए।
