गाजियाबाद में देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त 9 आरोपियों की गिरफ्तारी
गिरोह का पर्दाफाश
- विदेश भेजते थे संवेदनशील डेटा
गाजियाबाद में बड़ा खुलासा: पुलिस कमिश्नरेट ने एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 9 मोबाइल फोन, 10 सिम कार्ड और 2 सीसीटीवी कैमरे बरामद हुए हैं। आरोप है कि यह गिरोह देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और सुरक्षा बलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी विदेश भेज रहा था।
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना
पुलिस के अनुसार, 14 मार्च 2026 को थाना कौशांबी में सूचना मिली थी कि भोवापुर क्षेत्र के कुछ युवक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। ये युवक रेलवे स्टेशन और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की वीडियो बनाकर विदेश भेजते थे और पैसों का लालच देकर अन्य युवाओं को भी इस नेटवर्क में शामिल करते थे। सूचना के आधार पर मामला दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और पहले चरण में 5 पुरुष और 1 महिला को गिरफ्तार किया। उनके मोबाइल फोन से महत्वपूर्ण लोकेशन, फोटो और वीडियो बरामद हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी का गठन किया गया।
गिरफ्तारी की प्रक्रिया
20 मार्च को 9 आरोपियों की गिरफ्तारी
जांच के दौरान यह पता चला कि गिरोह का संचालन सीमापार से हो रहा था। मुख्य हैंडलर के रूप में सुहेल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर के नाम सामने आए हैं। पुलिस ने 20 मार्च को 5 बाल अपचारियों समेत कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी देश के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा बलों के ठिकानों, रेलवे स्टेशनों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर उनकी फोटो, वीडियो और जीपीएस लोकेशन विदेशी नंबरों पर भेजते थे।
तकनीकी जानकारी का उपयोग
इसके लिए उनके मोबाइल में विशेष ऐप इंस्टॉल किया गया था, जिसकी ट्रेनिंग भी विदेश से ऑनलाइन दी जाती थी। गिरोह ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सौर ऊर्जा से चलने वाले सिम आधारित सीसीटीवी कैमरे भी लगाए थे, जिनकी लाइव फीड विदेश भेजी जा रही थी। पुलिस ने ये कैमरे बरामद कर लिए हैं। इसके अलावा 50 अन्य स्थानों पर ऐसे कैमरे लगाने की योजना थी।
आर्थिक लेनदेन
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी भारतीय सिम कार्ड के ओटीपी विदेश भेजते थे, ताकि व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया अकाउंट संचालित किए जा सकें। इसके लिए उन्हें 500 से 5000 रुपये तक मिलते थे, जबकि अलग-अलग टास्क के लिए 500 से 15,000 रुपये तक भुगतान किया जाता था। भुगतान यूपीआई के जरिए दुकानों या जन सेवा केंद्रों पर कराया जाता था, जहां से आरोपी नकद राशि लेते थे।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस के मुताबिक, गिरोह में मुख्य रूप से तकनीकी जानकारी रखने वाले कम उम्र के युवाओं को शामिल किया जाता था, जिन्हें पैसों का लालच दिया जाता था। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर की तलाश में जुटी है और मामले की जांच जारी है।
