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गिग वर्कर्स का विरोध: ईंधन की बढ़ती कीमतों से प्रभावित सेवाएं बंद

गिग वर्कर्स ने बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों के खिलाफ आज विरोध प्रदर्शन किया है, जिससे Zomato, Swiggy, और अन्य ऐप आधारित सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। यूनियन ने कंपनियों से प्रति किलोमीटर भुगतान बढ़ाने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान कई सेवाएं पांच घंटे तक बंद रहेंगी। महिला गिग वर्कर्स इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। यदि राहत नहीं मिली, तो कई कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं। जानें इस मुद्दे की पूरी जानकारी।
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गिग वर्कर्स का विरोध: ईंधन की बढ़ती कीमतों से प्रभावित सेवाएं बंद

नई दिल्ली में गिग वर्कर्स का प्रदर्शन


नई दिल्ली: देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव अब ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण गिग वर्कर्स ने आज विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इसका असर Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित सेवाओं पर पड़ सकता है। यूनियन ने पांच घंटे तक सेवाएं बंद रखने की घोषणा की है और कंपनियों से प्रति किलोमीटर भुगतान में वृद्धि की मांग की है। हाल ही में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग चार साल बाद महत्वपूर्ण बढ़ोतरी हुई है।


ईंधन की कीमतों में वृद्धि

रिपोर्टों के अनुसार, ईंधन की कीमतें लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 90.67 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों ने लाखों डिलीवरी एजेंटों और ड्राइवरों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। यूनियन के अनुसार, देश में लगभग 1.2 करोड़ लोग ऐसे हैं जो रोजाना की कमाई के लिए बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं। ऐसे में ईंधन की महंगाई उनके खर्च को लगातार बढ़ा रही है।


सेवाओं का पांच घंटे का बंद

आज पांच घंटे बंद रहेंगी कई सेवाएं


यूनियन ने विरोध के तहत दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाओं को बंद रखने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि प्रति किलोमीटर भुगतान नहीं बढ़ाया गया तो काम करना और भी कठिन हो जाएगा। यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि डिलीवरी कर्मी पहले से ही महंगाई, गर्मी और लंबे कार्य घंटों से परेशान हैं। ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें उनके लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन गई हैं। उन्होंने सरकार और कंपनियों से न्यूनतम 20 रुपये प्रति किलोमीटर की दर तय करने की मांग की है।


महिला गिग वर्कर्स पर प्रभाव

महिला गिग वर्कर्स पर ज्यादा असर


यूनियन का दावा है कि महिला गिग वर्कर्स और डिलीवरी एजेंट इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई महिलाएं प्रतिदिन 10 से 14 घंटे तक ट्रैफिक और खराब मौसम में काम करती हैं, लेकिन उनकी आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं दी गई तो कई कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं। उनका कहना है कि बढ़ते ईंधन और वाहन रखरखाव खर्च के मुकाबले इंसेंटिव और डिलीवरी शुल्क में पर्याप्त बदलाव नहीं किए गए हैं।


गिग इकोनॉमी की चुनौतियां

गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ीं


रिपोर्टों के अनुसार, भारत में गिग इकोनॉमी लगातार विस्तार कर रही है। नीति आयोग के अनुमान बताते हैं कि 2020-21 में देश में लगभग 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जबकि 2029-30 तक यह संख्या बढ़कर 2.3 करोड़ से अधिक हो सकती है। हालांकि, यूनियन का कहना है कि कंपनियां बढ़ते परिचालन खर्च के बावजूद डिलीवरी शुल्क और प्रोत्साहन राशि में आवश्यक बदलाव नहीं कर रही हैं। इससे कामगारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।


ज्ञापन का सौंपना

सरकार और कंपनियों को सौंपा गया ज्ञापन


गिग वर्कर्स यूनियन ने सरकार और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों को ज्ञापन सौंपकर डिलीवरी दरों में संशोधन और ईंधन मुआवजे की मांग की है। यूनियन ने कहा है कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य गिग वर्कर्स की बढ़ती परेशानियों की ओर सरकार और कंपनियों का ध्यान आकर्षित करना है। हड़ताल के चलते कई शहरों में फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।