गिग वर्कर्स के लिए बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की आवश्यकता
गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार की आवश्यकता
गिग वर्क का चलन तेजी से बढ़ रहा है, और इस क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के लिए मानवीय कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। गिग वर्कर यूनियनों की अन्य मांगों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
केंद्र सरकार ने ऐप के माध्यम से वस्तुओं की दस मिनट के भीतर डिलीवरी को रोकने के लिए उचित कदम उठाए हैं। इसका प्रभाव तुरंत देखने को मिला। केंद्रीय श्रम मंत्री की अध्यक्षता में ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विजी, और जमैटो जैसी कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस समयसीमा को समाप्त करने पर सहमति बनी। इन कंपनियों ने दावा किया कि उन्होंने इस समयसीमा को पूरा करने के लिए अतिरिक्त वेयरहाउस खोले और डिलीवरी ब्वॉयज की संख्या बढ़ाई, लेकिन घर-घर सामान पहुंचाने वाले श्रमिकों की नई बनी यूनियनें इससे सहमत नहीं थीं। इसलिए, 25 और 31 दिसंबर को आयोजित हड़ताल में उनकी एक प्रमुख मांग थी कि दस मिनट की डिलीवरी शर्त को समाप्त किया जाए।
यूनियनों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय श्रम मंत्रालय को ज्ञापन सौंपा, जिस पर श्रम मंत्री ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। गिग वर्क का चलन बढ़ने के साथ, श्रमिकों के लिए बेहतर और मानवीय कार्य परिस्थितियों को सुनिश्चित करना सरकार का कर्तव्य है। गिग वर्कर यूनियनों ने कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी उठाई हैं। चूंकि ऐप संचालक कंपनियों ने इन पर विचार करने का कोई संकेत नहीं दिया है, इसलिए यह अपेक्षित है कि सरकार अपनी पहल को आगे बढ़ाए।
यह ध्यान देने योग्य है कि यूनियनों ने न्यूनतम स्तर की मांगें रखी हैं, जिसमें गिग वर्करों को कर्मचारी का दर्जा देने की मांग शामिल नहीं है। यदि ऐसा हो जाता है, तो इन श्रमिकों को कई कानूनी सुरक्षा मिल जाएगी। ब्रिटेन में न्यायालय के निर्णय से ऐसे श्रमिकों को कर्मचारी का दर्जा मिला था। वर्तमान में भारत में मांग है कि श्रमिकों को उचित कमीशन मिले, डिलीवरी से संबंधित सख्त समयसीमा को हटाया जाए, और कर्मचारियों को सेवा से हटाने से पहले उनका पक्ष सुना जाए। इनमें से एक मांग अब पूरी हो गई है, जिससे गिग वर्करों को राहत मिलेगी। हालांकि, उनके कार्य परिस्थितियों को बेहतर और मानवीय बनाने के लिए अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।
