गुजरात के विश्वविद्यालय में पीएम मोदी और RSS का पाठ्यक्रम शामिल
वडोदरा विश्वविद्यालय में ऐतिहासिक बदलाव
वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में स्थित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय (MSU) ने अपने पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परिवर्तन किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने घोषणा की है कि अब छात्रों को क्लासरूम में 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (RSS) के इतिहास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण पर आधारित 'मोदी तत्व' की विस्तृत पढ़ाई कराई जाएगी। इन नए विषयों को शामिल करने का उद्देश्य छात्रों को देश की वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक संरचना से बेहतर तरीके से जोड़ना है।
'मोदी तत्व' पर विशेष ध्यान
'मोदी तत्व' में पीएम के व्यक्तित्व और 'मेक इन इंडिया' पर फोकस
इस नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत 'मोदी तत्व' नामक एक विशेष विषय जोड़ा गया है, जो पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व और उनकी कार्यशैली पर केंद्रित है। इसमें छात्रों को पीएम मोदी की नेतृत्व क्षमता, उनके प्रभावशाली व्यक्तित्व और उनके कार्य करने के विशेष तरीकों के बारे में गहराई से जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही, समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से 'मेक इन इंडिया' जैसे बड़े सरकारी अभियानों के भारतीय समाज पर प्रभाव का भी विश्लेषण किया जाएगा।
RSS के इतिहास और राष्ट्रवाद पर शिक्षा
RSS के इतिहास और राष्ट्रवाद की दी जाएगी विस्तृत शिक्षा
विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के छात्र अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के जन्म, उसके विस्तृत इतिहास और समाज के सांस्कृतिक उत्थान में संघ के योगदान को भी समझेंगे। इस विषय के तहत विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, पर्यावरण संरक्षण और स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका पर चर्चा होगी। छात्रों को यह भी सिखाया जाएगा कि एक नॉन-प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन के सफल प्रबंधन के लिए संघ की अनुशासित कार्यशैली को समझना क्यों आवश्यक है।
महान विचारकों के विचार पाठ्यक्रम में शामिल
सावरकर, अंबेडकर और शिवाजी महाराज के विचार भी सिलेबस में शामिल
एमएस यूनिवर्सिटी के 'बोर्ड ऑफ स्टडीज' ने चार नए पाठ्यक्रमों को मंजूरी दी है, जिनमें देश के महान नायकों और विचारकों को प्रमुखता दी गई है। अब छात्र वीर सावरकर, महर्षि अरविंद और डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों का गहराई से अध्ययन करेंगे। इसके अलावा, छत्रपति शिवाजी महाराज और महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ के कुशल शासन और उनके सामाजिक सुधारों को भी पढ़ाया जाएगा। एक चौथा विषय पूरी तरह से 'राष्ट्रवाद' पर केंद्रित है, जिसमें राष्ट्र और राज्य की परिभाषा और राष्ट्रवाद पर भारतीय समाजशास्त्रियों के विचारों पर चर्चा की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का दृष्टिकोण
पाठ्यक्रम में इस बड़े बदलाव पर क्या बोला विश्वविद्यालय प्रशासन?
सिलेबस में किए गए इस महत्वपूर्ण बदलाव पर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रमुख डॉ. वीरेंद्र सिंह ने प्रशासन का पक्ष रखा है। उनका कहना है कि इन नए विषयों के जुड़ने से छात्र वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिवेश को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे। उन्होंने बताया कि सरकारी थिंक टैंक 'नीति आयोग' की हालिया शोध परियोजनाओं में छात्रों को सरकारी पहलों के साथ जुड़ते हुए देखा गया है, इसलिए इन महत्वपूर्ण विषयों को औपचारिक रूप से सिलेबस का हिस्सा बनाना एक स्वाभाविक और प्रगतिशील कदम है।
