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गुजरात ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दी, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

गुजरात ने हाल ही में यूनिफॉर्म सिविल कोड को विधानसभा से पारित किया है, जिससे शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव आएंगे। इस कानून के तहत महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, जबकि कांग्रेस ने इसके खिलाफ विरोध जताया है। जानें इस नए कानून के प्रमुख प्रावधान और इसके सामाजिक प्रभाव के बारे में।
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गुजरात ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दी, महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

गुजरात ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को मंजूरी दी


उत्तराखंड के बाद, गुजरात अब दूसरा राज्य बन गया है जिसने विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड को पारित किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में पेश किया, जिसे कांग्रेस के विरोध के बावजूद लगभग सात घंटे की चर्चा के बाद मंजूरी दी गई। जैसे ही राज्यपाल इस पर हस्ताक्षर करेंगे, यह कानून प्रभावी हो जाएगा। हालांकि, आदिवासी समुदाय को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।


गुजरात रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिजेस एक्ट-2006 रद्द

इस नए कानून के लागू होने पर पुराना गुजरात रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिजेस एक्ट-2006 समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही शादी, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप के लिए समान नियम लागू होंगे। नए प्रावधानों के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को अब अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यदि रिश्ता समाप्त होता है, तो इसकी आधिकारिक जानकारी भी देनी होगी। इस रिश्ते से जन्मे बच्चे को पूरी तरह से वैध माना जाएगा। यदि कोई महिला इस रिश्ते में पीछे रह जाती है, तो वह कानूनी रूप से भरण-पोषण की मांग कर सकती है।


धोखे से शादी पर 7 साल की जेल

शादी और तलाक के नियमों में सख्ती की गई है। अब राज्य में बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। जबरदस्ती, धोखे या दबाव में की गई शादी के लिए 7 साल तक की जेल हो सकती है। शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा, न मानने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इसके अलावा, बिना कोर्ट के आदेश के अपनी पार्टनर को छोड़ने या तलाक देने पर 3 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। हालांकि, तलाक के बाद कोई भी जोड़ा बिना किसी शर्त के दोबारा शादी कर सकता है।


महिलाओं के अधिकारों की रक्षा

बिल पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि विभिन्न सिविल कानूनों के कारण महिलाओं को काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने फ्रांस, जर्मनी और तुर्की जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि यह कानून किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी को समान अधिकार देने के लिए है। मुख्यमंत्री पटेल ने इसे पीएम मोदी के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया, जो राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को सुनिश्चित करेगा। साथ ही, यह सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के अनुसार महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा।


कांग्रेस ने किया बिल का विरोध

मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इस बिल का कड़ा विरोध किया। गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इसे राजनीति से प्रेरित बताते हुए सवाल उठाया कि विधायकों को पहले जस्टिस रंजना देसाई पैनल की रिपोर्ट क्यों नहीं दी गई। उन्होंने इस बिल को अगले सत्र तक एक विधायक समिति के पास भेजने की भी मांग की।