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गुरुग्राम में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

गुरुग्राम में रोजगार के नए अवसरों के लिए तीन नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया जा रहा है। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ने 12 गांवों में 1800 एकड़ भूमि का चयन किया है। यह पहल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद करेगी। जानें इस परियोजना के बारे में और अधिक जानकारी।
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गुरुग्राम में नए औद्योगिक क्षेत्रों का विकास, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

गुरुग्राम में रोजगार के नए अवसर

गुरुग्राम. गुरुग्राम जिले में रोजगार के नए अवसरों को लेकर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिल्ली के निकट स्थित इस औद्योगिक केंद्र में तीन नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाएंगे। इसके लिए हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HSIIDC) ने 12 गांवों में लगभग 1800 एकड़ भूमि का चयन किया है। भूमि की खरीद ई-भूमि पोर्टल के माध्यम से बातचीत के आधार पर की जाएगी, जिससे किसानों और भूमि मालिकों को सीधा लाभ मिल सके।


स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाएं

गुरुग्राम पहले से ही ऑटोमोबाइल, आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का एक प्रमुख केंद्र है। नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में वृद्धि की उम्मीद है। पटौदी, फर्रूखनगर और आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी।


पटौदी में पहला औद्योगिक क्षेत्र

पटौदी में पहला औद्योगिक क्षेत्र, 750 एकड़ भूमि तय

पद्मा योजना के तहत पहला औद्योगिक क्षेत्र पटौदी में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए रामपुर, जनौला, जोरी और जटोला गांव की 750 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। यह क्षेत्र पहले से ही बेहतर कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों के लिए सुविधाजनक होगा।


अन्य औद्योगिक क्षेत्रों का विकास

पटौदी-फर्रूखनगर और फर्रूखनगर-हरसरू में भी विकास

दूसरा औद्योगिक क्षेत्र पटौदी-फर्रूखनगर क्षेत्र में प्रस्तावित है, जिसके लिए जटोला, जोरी, सांपका और ताजनगर गांव की 500 एकड़ भूमि का चयन किया गया है। तीसरा औद्योगिक क्षेत्र फर्रूखनगर-हरसरू में विकसित होगा, जहां बाबरा बाकीपुर, ख्वासपुर, पतली हाजीपुर और धाना गांव की 550 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है।


भूमि अधिग्रहण की नई प्रक्रिया

भूमि अधिग्रहण नहीं, आपसी सहमति से खरीद

HSIIDC के एक अधिकारी ने बताया कि अधिसूचित गांवों के भूमि मालिक ई-भूमि पोर्टल पर अपनी भूमि का विवरण दर्ज करेंगे। इसके बाद सत्यापन और अन्य औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

यह प्रक्रिया पारंपरिक भूमि अधिग्रहण की तरह नहीं होगी। सरकार भूमि को चरणबद्ध तरीके से खरीदेगी। पहले चरण में भूमि मालिकों के साथ सीधा एग्रीमेंट किया जाएगा और बातचीत के आधार पर कीमत तय की जाएगी। इस मॉडल से किसानों को बाजार दर के अनुसार मूल्य मिलने की संभावना है और परियोजना को कानूनी अड़चनों से बचाया जा सकेगा।