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गेहूं की आवक में तेजी, मंडियों में 87,000 क्विंटल से अधिक पहुंचा

जींद में गेहूं की आवक में तेजी आई है, जहां 87,000 क्विंटल से अधिक गेहूं मंडियों में पहुंचा है। इस दौरान, किसानों ने नए नियमों के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया है। मार्केट कमेटी ने किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए कई प्रबंध किए हैं। हालांकि, जुलाना में किसानों ने नए नियमों को अव्यवहारिक बताते हुए आंदोलन शुरू किया है। क्या सरकार इन नियमों को वापस लेगी? जानें पूरी खबर में।
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गेहूं की आवक में तेजी, मंडियों में 87,000 क्विंटल से अधिक पहुंचा

जींद में गेहूं की आवक में वृद्धि


जींद में गेहूं की आवक में तेजी आई है। इस बीच, आढ़तियों और किसानों ने नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। मंडियों में किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए सुरक्षा उपाय किए गए हैं। गेहूं के नियमों में बदलाव की मांग को लेकर आढ़तियों द्वारा की गई हड़ताल समाप्त हो गई है। जिन गेटों पर ताले लगे थे, उन्हें ट्रैक्टर ट्रॉलियों की एंट्री के लिए खोला गया है।


मार्केट कमेटी की तैयारियां

मार्केट कमेटी के सचिव योगेश गुप्ता ने बताया कि किसानों को गेट पास और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में केवल एक से दो मिनट का समय लग रहा है। दोपहर तीन बजे तक उचाना मार्केट कमेटी के अधीन आने वाली मंडियों में 1,073 गेट पास जारी किए गए हैं, और 85,380 क्विंटल गेहूं की आवक हुई है। हाइवे पर अतिरिक्त मंडियों में चार-चार प्वाइंट बनाए गए हैं और 60 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो।


किसानों की समस्याएं और विरोध

मार्केट कमेटी के अध्यक्ष सुरेंद्र खरकभूरा ने कहा कि किसानों और आढ़तियों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री ने खरीद प्रक्रिया और नियमों की जानकारी ली है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हित में निर्णय ले रही है और उनकी फसल का हर दाना एमएसपी पर खरीदा जाएगा। विपक्ष की ओर से किसानों को गुमराह करने की कोशिश की गई, लेकिन वे सफल नहीं हुए।


जुलाना में धरना प्रदर्शन

जुलाना कस्बे की नई अनाज मंडी में सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने धरना शुरू किया है। धरने की अध्यक्षता भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान नरेंद्र ढांडा ने की। धरने में क्षेत्र के कई गांवों से किसान शामिल हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ढांडा ने कहा कि नए नियम किसानों और आढ़तियों के हितों के खिलाफ हैं।


नए नियमों का विरोध

किसानों ने ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट अनिवार्य करने और बायोमेट्रिक प्रणाली को अव्यवहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इन नियमों को वापस नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने प्रशासन को पहले भी ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।