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ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने नागरिकों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें। अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की संभावनाओं के चलते सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। नीलसन ने एक विशेष टास्क फोर्स के गठन और नए दिशा-निर्देशों की घोषणा की है, जिसमें नागरिकों को घरों में आवश्यक सामान का भंडार रखने की सलाह दी गई है। जानें इस स्थिति का अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ सकता है और ग्रीनलैंड की सरकार ने नागरिकों को क्या सलाह दी है।
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ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने नागरिकों को आपात स्थिति के लिए तैयार रहने की सलाह दी

आपात स्थिति की तैयारी के लिए अपील

नई दिल्ली - ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने हाल ही में अपने नागरिकों और स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें। अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की संभावनाओं के बारे में की गई टिप्पणियों के बाद, क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, नीलसन ने यह भी कहा कि सैन्य टकराव की संभावना कम है, लेकिन इसे पूरी तरह से नकारा नहीं किया जा सकता।


प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करेगी और जल्द ही नए दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इन दिशा-निर्देशों में नागरिकों को सलाह दी जाएगी कि वे अपने घरों में कम से कम पांच दिनों के लिए भोजन और आवश्यक सामान का भंडार रखें, ताकि किसी भी आकस्मिक संकट के समय परेशानी न हो।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा है कि सुरक्षा कारणों से ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में होना चाहिए। उनकी इन टिप्पणियों ने ग्रीनलैंड की संप्रभुता पर सवाल उठाए हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ाई है।


ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच सबसे छोटा मार्ग माना जाता है, जो इसे मिसाइल चेतावनी प्रणालियों और समुद्री सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। इसके अलावा, इस द्वीप में खनिज, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे संसाधनों के बड़े भंडार होने की संभावना भी है, जो इसे आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं।


ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, नाटो का हिस्सा भी है। ऐसे में किसी भी सैन्य टकराव का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे पर पड़ सकता है। ट्रंप की टिप्पणियों के बाद, डेनमार्क सहित कुछ नाटो देशों ने ग्रीनलैंड में अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ग्रीनलैंड की सरकार ने नागरिकों को घबराने की आवश्यकता नहीं बताई है, लेकिन “हर परिस्थिति के लिए तैयार” रहने की सलाह दी है, ताकि किसी भी संभावित संकट का सामना संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से किया जा सके।