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चीन की पैंगोंग त्सो में स्थायी सैन्य निर्माण से भारत की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ीं

भारत और चीन के बीच हाल के संवादों के बावजूद, पैंगोंग त्सो क्षेत्र में चीन द्वारा स्थायी सैन्य ढांचे का निर्माण भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहा है। नई सैटेलाइट इमेजरी से पता चलता है कि चीन ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्माण सर्दियों की रणनीति से जुड़ा है। जानें इस मुद्दे पर और क्या जानकारी है और यह भारत-चीन संबंधों को कैसे प्रभावित कर सकता है।
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चीन की पैंगोंग त्सो में स्थायी सैन्य निर्माण से भारत की सुरक्षा चिंताएँ बढ़ीं

चीन की सैन्य गतिविधियों में वृद्धि


नई दिल्ली: हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच संवाद और कूटनीतिक प्रयासों में वृद्धि हुई है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही बयां कर रही है। नई हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि चीन पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति को स्थायी बनाने में लगा हुआ है। झील के निकट हो रहे निर्माण कार्य ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है।


पैंगोंग त्सो में निर्माण गतिविधियाँ

हाल की सैटेलाइट तस्वीरों में पैंगोंग त्सो झील के किनारे स्थायी इमारतें दिखाई दे रही हैं। यह निर्माण सिरिजाप पोस्ट के आसपास हो रहा है, जो 1962 के युद्ध के बाद से चीन के नियंत्रण में है। भारत इस क्षेत्र को अपना मानता है। झील से कुछ मीटर की दूरी पर बने ये ढांचे चीन को अतिरिक्त सैन्य संसाधनों को तैनात करने में सहायता कर सकते हैं।


2013 से निर्माण की प्रक्रिया

चीन ने इस क्षेत्र में 2013 से सड़क नेटवर्क का विकास शुरू किया था। पहले, इस मार्ग का उपयोग दोनों देशों की सेनाएं गश्त के लिए करती थीं। मई 2020 में हुई झड़प के बाद भारतीय गश्ती दल की आवाजाही यहां रुक गई। तब से चीन ने अस्थायी कैंप, नावें और झील पार करने के लिए घाट जैसी सुविधाएं स्थापित कर दी थीं।


सर्दियों की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के निर्माण सर्दियों की रणनीति से संबंधित हैं। पहले झील में तैनात नावें अब ढकी हुई और किनारे पर खड़ी नजर आ रही हैं। यह संकेत देता है कि झील के जमने की स्थिति में भी संचालन जारी रखने की योजना है। दिसंबर 2025 की तस्वीरों में कई नई स्थायी इमारतें स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं।


भारत-चीन संबंधों में सुधार, लेकिन संदेह बरकरार

पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच संवाद में वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एससीओ सम्मेलन में चीन दौरा और सीधी उड़ानों की बहाली इसका संकेत है। पूर्वी लद्दाख में डिसएंगेजमेंट की बात भी की गई है। लेकिन पैंगोंग क्षेत्र में निर्माण गतिविधियाँ यह दर्शाती हैं कि जमीनी स्तर पर भरोसे की कमी अब भी बनी हुई है।


भारत के लिए रणनीतिक चुनौती

जियोस्पेशियल विशेषज्ञों के अनुसार, स्थायी सैन्य ढांचे बनाकर चीन नियंत्रण को मजबूत करने की नीति पर कार्य कर रहा है। यह क्षेत्र विवादित है और ऐसे निर्माण भारत की स्थिति को कमजोर कर सकते हैं। सालभर सैन्य संचालन की क्षमता बढ़ने से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। आने वाले समय में यह गतिविधि भारत-चीन संबंधों की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण कारक बन सकती है।