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चीन की प्राचीन प्रथा: गुफा देवता के लिए बलिदान

चीन में एक खौफनाक प्रथा का अस्तित्व था, जिसमें अविवाहित और सुंदर युवतियों को गुफा देवता की दुल्हन बनने के लिए बलिदान दिया जाता था। इस प्रथा का नाम 'लूओ हुआ डोंग नु' था, जो मुख्य रूप से दक्षिणी चीन के मियाओ समुदायों में प्रचलित थी। जानें इस प्रथा के पीछे की भयावहता और इसके अजीबोगरीब अनुष्ठान के बारे में।
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चीन की प्राचीन प्रथा: गुफा देवता के लिए बलिदान

चीन में खौफनाक प्रथा का रहस्य

बीजिंग: चीन में एक प्राचीन और डरावनी प्रथा का अस्तित्व था, जो सुनने में ही भयावह लगती है। इस प्रथा के अंतर्गत अविवाहित, सुंदर और बुद्धिमान युवतियों को एक भयानक मौत का सामना करना पड़ता था। इन्हें 'गुफा देवता' की दुल्हन बनने के लिए चुना जाता था और फिर हमेशा के लिए अंधेरी गुफाओं में छोड़ दिया जाता था, जहां वे भूख और प्यास से तड़पकर अपनी जान दे देती थीं।


‘लूओ हुआ डोंग नु’ प्रथा का परिचय

हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार, इस खौफनाक प्रथा को 'लूओ हुआ डोंग नु' के नाम से जाना जाता था। यह मुख्य रूप से दक्षिणी चीन के पश्चिमी हुनान प्रांत में मियाओ समुदायों के बीच प्रचलित थी। हालांकि यह प्रथा अब समाप्त हो चुकी है, लेकिन इसके उद्भव के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। इस प्रथा में 16 से 25 वर्ष की उम्र की उन अविवाहित महिलाओं को बलि के लिए चुना जाता था, जिनकी आंखें चमकदार होती थीं और जो सौम्य, बुद्धिमान और सुंदर मानी जाती थीं। माना जाता था कि पहाड़ों की गुफाओं में देवताओं का निवास होता है और उन्हें प्रसन्न करने के लिए इन लड़कियों को वहां भेजा जाता था।


गुफा देवता की दुल्हन कैसे चुनी जाती थी

लड़कियों के चयन की प्रक्रिया भी अजीब थी। जब कोई अविवाहित युवती विवाह योग्य उम्र में भी कुंवारी रह जाती थी, तो उसके व्यवहार में बदलाव आ जाता था। अत्यधिक साफ-सफाई रखना, अकेले रहना और खुद से बातें करना जैसे लक्षण दिखने पर स्थानीय लोग मान लेते थे कि उसने किसी देवता को अपना पति मान लिया है। ऐसे में परिवार वाले चिंतित हो जाते थे और गुफाओं में जाकर देवता से प्रार्थना करते थे। यदि लड़की ठीक नहीं होती थी, तो परिवार उसे 'बलि' के रूप में गुफा में भेजने के लिए तैयार हो जाता था।


अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि विवाह समारोह

स्थानीय समुदाय का मानना था कि ये लड़कियां गुफा के देवता से विवाह कर रही हैं। इसलिए, उनकी मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार नहीं किया जाता था, बल्कि एक विवाह समारोह का आयोजन होता था। एक शुभ तिथि तय करके लड़की को गुफा में भेजा जाता था, जहां भूख और प्यास के कारण उसकी मृत्यु हो जाती थी। पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत लड़की के लिए दहेज तैयार किया जाता था और उसे गुफा के बाहर जलाया जाता था, जिससे यह माना जाता था कि उसका सम्मानपूर्वक विवाह हो गया है।


खौफनाक प्रथाएं और जादू-टोना

इंसानों और देवताओं के बीच विवाह की यह प्रथा शियांग्शी की तीन सबसे बड़ी बुराइयों में से एक मानी जाती थी। इसके अलावा, इस क्षेत्र में कई अन्य अजीब और रहस्यमयी अनुष्ठान भी प्रचलित थे, जैसे 'शव को हांकना'। इस प्रथा में एक तांत्रिक मृत शरीरों को रात के अंधेरे में चलने का निर्देश देता था, जिसे काले जादू का एक रूप माना जाता था।