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चीन की भूमिका: ईरान को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ मजबूत समर्थन

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की स्थिति को मजबूत करने के लिए चीन ने गुप्त रूप से सैन्य सहायता प्रदान की है। एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चीन ने ईरान को आक्रामक ड्रोन, रॉकेट ईंधन बनाने वाले रसायन और सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम मुहैया कराया है। यह जानकारी वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हलचल पैदा कर रही है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
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चीन की भूमिका: ईरान को अमेरिका-इजरायल के खिलाफ मजबूत समर्थन

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष

वाशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने अब 19 दिन पूरे कर लिए हैं। इस दौरान, अमेरिका और इजरायल के हमलों ने ईरान में व्यापक तबाही मचाई है, जबकि ईरान भी लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। इसी बीच, अमेरिकी कांग्रेस के एक महत्वपूर्ण आयोग ने एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें चीन के ईरान को सैन्य सहायता देने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान को आक्रामक ड्रोन, रॉकेट ईंधन बनाने वाले रसायन और सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम प्रदान किया है, जिसका उपयोग पश्चिम एशिया में हमलों के लिए किया जा रहा है।


चीन-ईरान हथियार सौदों का खुलासा

आयोग द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले, चीन ने ईरान को हथियारों की बिक्री में सक्रियता दिखाई थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चीन और ईरान के बीच एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों की बिक्री का सौदा लगभग तय हो गया था, लेकिन अंतिम समय पर डिलीवरी की तारीख पर सहमति नहीं बन पाई।


रॉकेट ईंधन के लिए रसायनों की आपूर्ति

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन ने ईरान को रॉकेट ईंधन बनाने के लिए आवश्यक रसायन 'सोडियम पर्क्लोरेट' की बिक्री की अनुमति दी। बताया गया है कि मार्च 2026 में ईरान के दो सरकारी जहाज इस रसायन की बड़ी खेप लेकर चीन के गाओलान बंदरगाह से रवाना हुए थे। इससे पहले, जनवरी 2025 में भी चीन ने ईरान को लगभग 1000 टन सोडियम पर्क्लोरेट भेजा था।


सटीक हमलों के लिए सैटेलाइट नेविगेशन

अमेरिकी आयोग ने यह भी बताया कि चीन ने 2021 में ईरान को अपने 'नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' तक सैन्य स्तर की पहुंच प्रदान की थी। इस प्रणाली की मदद से ईरान अपने हमलों को अधिक सटीक बना सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान संभवतः वर्तमान में इस सैटेलाइट सिस्टम का उपयोग इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के लिए कर रहा है।