चुनाव आयोग का SIR: 12 राज्यों में 6.5 करोड़ मतदाता नाम हटाए गए
चुनाव आयोग के SIR में महत्वपूर्ण परिवर्तन
नई दिल्ली: चुनाव आयोग द्वारा संचालित स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दूसरे चरण में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। इस चरण में 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से कुल 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। आयोग के अधिकारियों ने बताया कि हटाए गए नामों को ASD श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है, जिसका अर्थ है एबसेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लीकेट मतदाता।
दूसरे चरण से पहले इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 50.90 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, लेकिन ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद यह संख्या घटकर 44.40 करोड़ रह गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह कमी मृत्यु, स्थायी पलायन और एक से अधिक पंजीकरण के कारण हुई है। चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि शहरी क्षेत्रों में जनगणना फॉर्म का संग्रहण ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में काफी कम रहा है।
उत्तर प्रदेश में मतदाता नामों की कटौती
उत्तर प्रदेश से कितने लोगों के नाम हटे?
उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची SIR के बाद जारी की गई, जिसमें 2 करोड़ 89 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। राज्य में पहले 15 करोड़ 44 लाख मतदाता पंजीकृत थे, जबकि नई ड्राफ्ट सूची में 12 करोड़ 55 लाख मतदाता बनाए रखे गए हैं। हटाए गए मतदाताओं की संख्या कुल का 18.70 प्रतिशत है। अधिकारियों ने बताया कि ये नाम मृत्यु, स्थायी पलायन या डुप्लीकेट पंजीकरण के कारण हटाए गए हैं।
SIR के दूसरे चरण में शामिल राज्य
SIR का दूसरे चरण में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
4 नवंबर से SIR का दूसरा चरण आरंभ हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। असम में विशेष पुनरीक्षण अलग से किया जा रहा है।
SIR का महत्व
इस बार का SIR क्यों है अहम?
अधिकांश राज्यों में अंतिम बार मतदाता सूची का SIR 2002 से 2004 के बीच हुआ था। इस बार का SIR अवैध विदेशी घुसपैठियों की पहचान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव आयोग का मुख्य उद्देश्य जन्म स्थान की जांच कर अवैध प्रवासियों को सूची से बाहर करना है। बांग्लादेश और म्यांमार से आए अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
