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चुलकाना धाम के श्री श्याम मंदिर प्रबंधन विवाद का समाधान

हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित चुलकाना धाम के प्राचीन श्री श्याम मंदिर के प्रबंधन विवाद का समाधान पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में हुआ। अदालत ने श्राइन बोर्ड के गठन की बात की, जिसमें याचिकाकर्ता संस्था का प्रतिनिधित्व भी होगा। जानें इस विवाद का समाधान कैसे हुआ और भविष्य में मंदिर प्रबंधन को लेकर क्या कदम उठाए जाएंगे।
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चुलकाना धाम के श्री श्याम मंदिर प्रबंधन विवाद का समाधान

श्री श्याम मंदिर प्रबंधन विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित चुलकाना धाम के प्राचीन श्री श्याम मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा विवाद गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में एक सकारात्मक समाधान के साथ समाप्त हुआ। जस्टिस जगमोहन बंसल की अदालत में सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया कि मंदिर के प्रबंधन को व्यवस्थित करने के लिए एक श्राइन बोर्ड का गठन किया जाएगा, जिसमें याचिकाकर्ता संस्था ‘श्री श्याम मंदिर सेवा समिति’ का एक प्रतिनिधि भी शामिल होगा। इस सहमति के बाद अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए सरकार से बोर्ड के गठन की जल्दी करने की अपेक्षा जताई। यह मामला तब अदालत में पहुंचा जब 13 जनवरी 2025 को एक सरकारी आदेश के माध्यम से राज्य ने प्राचीन श्री श्याम मंदिर, समालखा, जिला पानीपत के प्रबंधन के लिए श्राइन बोर्ड बनाने की योजना बनाई थी। इस निर्णय को चुनौती देते हुए ‘श्री श्याम मंदिर सेवा समिति, रजिस्टर्ड, चुलकाना धाम’ ने याचिका दायर की थी, जिसमें इसे निरस्त करने की मांग की गई थी। समिति को चिंता थी कि पारंपरिक प्रबंधन व्यवस्था और स्थानीय सहभागिता प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान हरियाणा के महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि विवाद अब आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। सरकार ने आश्वासन दिया कि मंदिर के सुचारु संचालन के लिए श्राइन बोर्ड बनेगा, जिसमें याचिकाकर्ता संस्था की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। याचिकाकर्ता और अन्य पक्षों ने भी इस व्यवस्था पर सहमति जताई। अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति को रिकॉर्ड में लेते हुए कहा कि जब विवाद का समाधान सौहार्दपूर्ण तरीके से निकल आया है, तो याचिका का निपटारा किया जाता है। साथ ही कोर्ट ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार श्राइन बोर्ड का गठन शीघ्र करेगी ताकि मंदिर प्रबंधन को लेकर भविष्य में किसी प्रकार की प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे।