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जगद्गुरु रामभद्राचार्य का केंद्र सरकार पर हमला: UGC नियमों को लेकर दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने UGC के नए नियमों को लेकर सरकार को चेतावनी दी कि समाज को विभाजित करने वाले कानूनों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। रामभद्राचार्य ने समाज में एकता का संदेश देते हुए जातिवाद की बढ़ती मानसिकता पर चिंता जताई। उन्होंने ब्राह्मण समाज को अपनी पहचान और संस्कारों की ओर लौटने की सलाह दी। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल ने भी राम की राजनीति का महत्व बताया।
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जगद्गुरु रामभद्राचार्य का केंद्र सरकार पर हमला: UGC नियमों को लेकर दी चेतावनी

लखनऊ में रामकथा के मंच से उठी आवाज


लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में आयोजित एक भव्य रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। विशेष रूप से, उन्होंने यूजीसी (UGC) के नए नियमों के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि समाज को विभाजित करने वाले कानूनों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब देश में शिक्षा और सामाजिक व्यवस्था के बीच तनाव बढ़ रहा है।


UGC नियमों पर सरकार को चुनौती

बस्ती के कप्तानगंज ब्लॉक के बढ़नी गांव में रामकथा के दौरान, जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि नए यूजीसी गाइडलाइंस की देश में क्या आवश्यकता थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज में भेदभाव फैलाना और विभाजन करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि गृहयुद्ध से बचना है, तो इन नियमों को तुरंत वापस लेना होगा। उनके रहते ये नियम लागू नहीं हो पाएंगे।


समाज को एकजुट रहने का संदेश

गुरु वशिष्ठ का उदाहरण: धर्माचार्य ने महर्षि वशिष्ठ और निषाद राज के बीच के संबंधों का उदाहरण देते हुए समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु वशिष्ठ ने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया और निषाद राज को पूरा सम्मान दिया। रामभद्राचार्य ने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि द्रोणाचार्य ने कर्ण को शिक्षा देने से मना नहीं किया होता, तो शायद महाभारत जैसा भीषण युद्ध नहीं होता। उन्होंने जातिवाद की बढ़ती मानसिकता को विनाशकारी बताया।


ब्राह्मण समाज को आत्ममंथन की आवश्यकता

त्यागपूर्ण संस्कारों की ओर लौटने की सलाह: कथा के दौरान, रामभद्राचार्य ने ब्राह्मण समाज को अपनी मूल पहचान और त्यागपूर्ण संस्कारों की ओर लौटने की सलाह दी। उन्होंने चिंता जताई कि आज कई ब्राह्मण मांस, मछली और मदिरा का सेवन करने लगे हैं, जो उनके पतन का मुख्य कारण है। उन्होंने गर्व से कहा कि ब्राह्मण कभी जातिवादी नहीं रहा है, बल्कि वह सबका मार्गदर्शक रहा है।


गुरु वशिष्ठ की महान परंपरा

महान ऋषि का योगदान: रामभद्राचार्य ने कुलगुरु ब्रह्मर्षि वशिष्ठ को महान ऋषि बताया, जिन्होंने प्रभु राम और उनके भाइयों को शास्त्र और राजधर्म की शिक्षा दी। उन्होंने याद दिलाया कि महाराज दशरथ अपने पुत्रों के भविष्य के लिए वशिष्ठ के आश्रम गए थे। भगवान राम संकट के समय हमेशा गुरु वशिष्ठ के संपर्क में रहते थे। कथा में 'भए प्रगट कृपाला' का सामूहिक गान सुनकर पूरा पांडाल भक्ति में डूब गया।


राम की राजनीति का संदेश

राजनीतिक सीख: कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल ने कहा कि राम ही भारत का असली आधार हैं। उन्होंने गुरु वशिष्ठ की सेवा भावना का उल्लेख करते हुए बताया कि वे अकेले दस हजार विद्यार्थियों का पालन-पोषण करते थे। राज्यपाल ने राजनेताओं को सलाह दी कि यदि उन्हें सच्ची राजनीति करनी है, तो उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम राम की राह पर चलना चाहिए। अंत में, जगद्गुरु ने राज्यपाल को रामचरितमानस भेंट की, जो इस आध्यात्मिक आयोजन का प्रेरणादायक क्षण था।