जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे ने सुरक्षा मानकों पर उठाए सवाल
जबलपुर में क्रूज दुर्घटना की गंभीरता
जबलपुर: हाल ही में जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधों की गंभीरता को उजागर किया है। एक नए वीडियो ने इस घटना को और भी चिंताजनक बना दिया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पर्यटक पहले सामान्य तरीके से यात्रा का आनंद ले रहे थे, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बदल गई।
अचानक क्रूज के अंदर पानी तेजी से भरने लगा, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। बच्चे रोने लगे, महिलाएं घबरा गईं और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। क्रूज तेज झटके खा रहा था और यात्रियों के चेहरे पर डर साफ दिखाई दे रहा था।
जबलपुर हादसे का सबसे खौफनाक वीडियो देखिए … क्रूज में पानी भरने के दौरान हादसे के ठीक पहले का वीडियो देखकर साफ़ पता चल रहा है लाइफ़ जैकेट बाद में दी गई … pic.twitter.com/v638olVo7O
— Anamika Singh kaali (@Anamika4S) May 1, 2026
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब क्रूज डूबने लगा, तब स्टाफ लाइफ जैकेट निकालता हुआ दिखाई दिया। कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के थे, जबकि कुछ लोग खुद से स्टोरेज खोलकर जैकेट खोजने लगे। यह स्पष्ट है कि सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया।
यात्रा शुरू होने से पहले हर यात्री को लाइफ जैकेट प्रदान करना और उसे पहनाना अनिवार्य है। इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 भी यही निर्देश देता है, लेकिन यहां लापरवाही स्पष्ट है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि क्रूज के लिए 29 टिकट जारी किए गए थे, जबकि उस पर 40 से अधिक लोग सवार थे। इसका मतलब है कि क्षमता से अधिक यात्रियों को बिठाया गया था।
मौसम विभाग ने पहले ही ऑरेंज अलर्ट जारी किया था और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज आंधी की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद क्रूज को पानी में उतार दिया गया। यह लापरवाही अब कई परिवारों के लिए गंभीर साबित हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक इस हादसे में 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4 लोग अभी भी लापता हैं। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा है, लेकिन बचाव कार्य में हुई देरी भी सवालों के घेरे में है।
कई रिपोर्टों में बताया गया है कि शाम 6:15 बजे हादसे की सूचना मिली थी, लेकिन पहली रेस्क्यू टीम 6:40 बजे तक रवाना नहीं हो सकी। तकनीकी खराबी के कारण उपकरण दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित करने पड़े। दूसरी टीम लगभग 7 बजे रवाना हुई। बचाव के शुरुआती दो घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, और यही देरी कई जिंदगियों पर भारी पड़ी।
इस पूरे हादसे ने प्रशासन, पर्यटन विभाग और सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि जब मौसम खराब था, नियम स्पष्ट थे और खतरे की चेतावनी पहले से मौजूद थी, तो इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई।
