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जबलपुर क्रूज हादसे में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे ने सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कैसे यात्री पानी में घुसने के बाद अफरा-तफरी में भागने लगे। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 4 लोग अभी भी लापता हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि क्रूज में अधिक यात्री सवार थे और लाइफ जैकेट का वितरण सही तरीके से नहीं किया गया। जानें इस दिल दहला देने वाली घटना के बारे में और क्या हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान।
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जबलपुर क्रूज हादसे में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज दुर्घटना

जबलपुर: जबलपुर के बरगी डैम में हुए क्रूज हादसे के संबंध में नए तथ्य सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें सुरक्षा प्रबंधों पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि क्रूज में सवार यात्री पहले सामान्य स्थिति में थे, लेकिन अचानक पानी तेजी से अंदर आने लगता है। कुछ ही क्षणों में माहौल में अफरा-तफरी मच जाती है—बच्चे रोने लगते हैं और यात्री जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगते हैं।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि क्रूज के स्टाफ ने लाइफ जैकेट तब निकालना शुरू किया, जब नाव डूबने लगी थी। कई यात्री बिना लाइफ जैकेट के दिखाई दिए, जबकि कुछ खुद स्टोरेज खोलकर उन्हें खोजते नजर आए। इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021 के अनुसार, हर यात्री को यात्रा शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट प्रदान करना और पहनाना अनिवार्य है, लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया गया।


प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि क्रूज के लिए 29 टिकट जारी किए गए थे, जबकि उसमें 40 से अधिक लोग सवार थे। हैरानी की बात यह है कि मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट और 50 किलोमीटर प्रति घंटे की आंधी की चेतावनी दी थी, फिर भी क्रूज को पानी में उतारा गया।
अब तक इस हादसे में 9 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं।


दिल दहला देने वाली घटना
इस हादसे की सबसे मार्मिक घटना दिल्ली से आए एक परिवार की है। मरीना मैसी ने अपने चार वर्षीय बेटे त्रिशान को अपनी लाइफ जैकेट में बांध लिया और अंतिम सांस तक उसे अपने सीने से लगाए रखा। जब दोनों के शव बरामद हुए, तब भी मां-बेटा एक-दूसरे से लिपटे हुए थे।
मरीना के पति प्रदीप मैसी ने बताया कि हादसे के दौरान स्टाफ केवल यात्रियों को बैठने के लिए कहता रहा और किसी प्रकार की मदद नहीं की। उन्हें एक ट्यूब मिली, जिसकी मदद से वे किनारे तक पहुंच सके।


रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी
हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में भी लापरवाही सामने आई। जानकारी के अनुसार, शाम 6:15 बजे घटना की सूचना मिलने के बावजूद पहली रेस्क्यू टीम 6:40 बजे तक रवाना नहीं हो सकी। वाहन में तकनीकी खराबी के कारण उपकरण दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करने पड़े। दूसरी टीम करीब 7 बजे रवाना हुई। इस देरी के कारण शुरुआती दो घंटे, जो बेहद महत्वपूर्ण थे, प्रभावित हुए—और यही देरी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकती थी।