जबलपुर त्रासदी: सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
जबलपुर त्रासदी की जिम्मेदारी किसकी?
जबलपुर के बरगी बांध में हुई क्रूज त्रासदी में लापता सभी व्यक्तियों के शव मिल चुके हैं। रविवार को अंतिम लापता व्यक्ति कामराज का शव भी बरामद किया गया। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिनके उत्तर शायद मोहन यादव की सरकार और पर्यटन विभाग के पास भी नहीं हैं। इस त्रासदी में शामिल मृतकों में वे लोग भी थे, जिन्होंने लाइफ जैकेट पहनी हुई थी। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिसमें एक बच्चा अपनी मां के साथ स्थिर पड़ा है, दोनों ने लाइफ जैकेट पहन रखी थी, लेकिन फिर भी उनकी जान नहीं बच सकी।
क्या लाइफ जैकेट की गुणवत्ता की जांच हुई थी?
इस त्रासदी के बाद कई रिपोर्टों में कहा गया है कि जब क्रूज हादसा हुआ, तब बोट पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। जब बोट डूबने लगा, तब हड़बड़ी में लाइफ जैकेट बांटी गई। यह दावा किया गया कि लाइफ जैकेट के बावजूद लोगों के डूबने का मुख्य कारण सही तरीके से जैकेट न पहनना, एक ही जैकेट में दो लोगों का होना, और सुरक्षा नियमों की अनदेखी थी। हालांकि, यह जांच का विषय है कि क्रूज स्टाफ द्वारा प्रदान की गई लाइफ जैकेट मानकों पर खरी उतरी थीं या नहीं। इसके अलावा, क्या वह क्रूज सुरक्षा मानकों का पालन करता था? यदि नहीं, तो उसके संचालन पर रोक क्यों नहीं लगाई गई? यह सवाल भी उठता है कि कब तक नियमों की अनदेखी से निर्दोष लोगों की जान जाती रहेगी। वर्तमान में, प्रशासन इस त्रासदी को क्रूज संचालकों की लापरवाही का बहाना बनाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है।
इंदौर गंदा पानी प्रकरण के बाद दिलीप कुमार यादव को मिली नई जिम्मेदारी
इंदौर, जो देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब आठ बार जीत चुका है, में कुछ महीने पहले गंदा पानी पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी। उस समय दिलीप कुमार यादव इंदौर नगर निगम आयुक्त थे। इस मामले के बढ़ने के बाद उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था। हालांकि, मोहन सरकार ने उन्हें पर्यटन विकास निगम का प्रबंध संचालक बना दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पर सरकार पर निशाना साधा था। अब जब दिलीप कुमार यादव के पर्यटन विकास निगम के प्रबंध संचालक रहते जबलपुर में यह त्रासदी हुई है, तो सवाल उठता है कि इंदौर की घटना से सबक लेने के बजाय उन्हें इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?
