जम्मू-कश्मीर में जंगल की आग से लैंडमाइनों में धमाके, सुरक्षा बलों की चिंता बढ़ी
श्रीनगर में बढ़ती आग की समस्या
श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के निकट लगी भीषण जंगल की आग ने सुरक्षा बलों के लिए चिंता का विषय बना दिया है। पिछले दो दिनों से जल रही इस आग के कारण सीमा पर बिछाई गई लैंडमाइनों में लगातार विस्फोट हो रहे हैं। अब तक लगभग एक दर्जन बारूदी सुरंगों के फटने की खबरें आई हैं, जिससे पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में तनाव और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
बालाकोट से मेंढर तक फैली आग
अधिकारियों के अनुसार, यह आग सोमवार को बालाकोट सेक्टर के बसूनी फॉरवर्ड इलाके के जंगलों में लगी थी। तेज हवाओं और सूखे मौसम के चलते आग तेजी से फैल गई और मंगलवार तक मेंढर सेक्टर के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया। नियंत्रण रेखा के पास स्थित घने जंगलों में आग लगने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है, क्योंकि इन्हीं क्षेत्रों में घुसपैठ रोकने के लिए सेना ने लैंडमाइंस बिछाई हैं।
लैंडमाइन विस्फोटों से बढ़ी चुनौतियाँ
आग की चपेट में आने के कारण लैंडमाइंस एक के बाद एक फट रही हैं। धमाकों की आवाज से न केवल सुरक्षाबलों को सतर्क रहना पड़ रहा है, बल्कि सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग भी दहशत में हैं। राहत की बात यह है कि अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार हो रहे विस्फोट सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
700 किलोमीटर लंबी सीमा पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
भारत-पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा पर लगभग 700 किलोमीटर लंबी बाड़ लगी हुई है। इस बाड़ की सुरक्षा के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों में लैंडमाइंस बिछाई गई हैं। इसके अलावा, आधुनिक सेंसर, निगरानी उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम भी लगाए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की घुसपैठ को समय पर रोका जा सके। लेकिन जंगलों में लगी आग और लैंडमाइन विस्फोटों ने इस सुरक्षा तंत्र को अस्थायी रूप से प्रभावित किया है।
सूखे मौसम का आग पर प्रभाव
जम्मू-कश्मीर में लंबे समय से बारिश की कमी और सूखे हालात के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विशेष रूप से पीर पंजाल रेंज के राजौरी और पुंछ जिलों में गर्म और शुष्क मौसम के दौरान ऐसी आग आम हो गई है। सूखी पत्तियां और घास आग को तेजी से फैलने में मदद करती हैं, जिससे हालात पर काबू पाना मुश्किल हो जाता है।
आग बुझाने और सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती
सेना और वन विभाग की टीमें आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटी हैं। दूसरी ओर, लैंडमाइन विस्फोटों से बने संभावित सुरक्षा अंतराल का फायदा कोई न उठा सके, इसके लिए एलओसी पर निगरानी और गश्त को और मजबूत कर दिया गया है। पिछले एक हफ्ते में यह दूसरी बार है जब पुंछ जिले में आग के कारण लैंडमाइंस फटी हैं। इससे पहले भी इसी तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
