जम्मू-कश्मीर में बादल फटने से मची तबाही: जानें क्या हुआ?

रामबन में बादल फटने की घटना
Ramban Cloudburst 2025: जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में शुक्रवार की रात बादल फटने से भारी तबाही हुई। अचानक आई बाढ़ और मलबे ने कई घरों को प्रभावित किया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इस प्राकृतिक आपदा में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और चार लोग लापता हैं। बचाव कार्य जारी है, लेकिन बारिश और पहाड़ी इलाकों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में कई चुनौतियाँ आ रही हैं।
राजगढ़ क्षेत्र पर सबसे अधिक असर
राजगढ़ क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, राजगढ़ क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है, जहाँ बादल फटने के कारण तेज़ बहाव ने कई मकानों को नष्ट कर दिया। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। घटना के बाद से ग्रामीणों में भय का माहौल है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए स्थानीय प्रशासन, NDRF, और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं।
सड़कों और पुलों को भी नुकसान
सड़कों और पुलों को भी हुआ नुकसान
तेज़ बहाव ने न केवल घरों को नुकसान पहुँचाया, बल्कि कई छोटी पुलियों और सड़कों को भी गंभीर क्षति पहुंचाई है। इससे आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है, जिससे राहत कार्यों में देरी हो रही है। प्रशासन ने वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था करने और क्षतिग्रस्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है।
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने पहले ही जारी किया था अलर्ट
मौसम विभाग ने पहले से ही भारी बारिश और बादल फटने की चेतावनी जारी की थी, लेकिन इसके बावजूद तबाही को नहीं रोका जा सका। पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में मूसलधार बारिश हो रही है, जिससे भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
पिछले दिनों की घटनाएँ
पिछले दिनों भी हुईं कई भयावह घटनाएं
रामबन की यह घटना हाल के दिनों में बादल फटने की चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिसोती गांव में बादल फटने से 65 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें कई तीर्थयात्री शामिल थे। इसके अलावा, कठुआ जिले में अचानक आई बाढ़ में पांच बच्चों सहित सात लोगों की जान गई थी। रियासी जिले में वैष्णो देवी मार्ग पर हुए भूस्खलन में 34 तीर्थयात्रियों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने जम्मू-कश्मीर में आपदा प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रक्षा मंत्री का दौरा
रक्षा मंत्री ने पहले भी किया था दौरा
किश्तवाड़ की घटना के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 24 अगस्त को जम्मू का दौरा कर स्थिति का जायज़ा लिया था। उन्होंने पीड़ितों के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। अब रामबन की घटना के बाद भी केंद्र और राज्य सरकारें राहत कार्यों में जुट गई हैं।
आपदा प्रबंधन की आवश्यकता
आपदा से निपटने की ज़रूरत और अधिक सशक्त बनानी होगी
बार-बार हो रही बादल फटने और बाढ़ की घटनाएँ यह संकेत देती हैं कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन तंत्र को और मज़बूत करने की आवश्यकता है। इसके साथ ही, स्थानीय लोगों को सतर्क रहने, पूर्व चेतावनी प्रणाली को सुधारने और आपदा के समय सुरक्षित स्थानों तक पहुँचने की व्यवस्था पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी हो गया है।